कांस्टेबल की मौत पर उठे सवाल: श्रीराम-केयर अस्पताल में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया
त्वरित ख़बरें : ज़ाफ़रान खान रिपोर्टिंग

बिलासपुर  श्रीराम-केयर अस्पताल में एक कांस्टेबल की मौत के बाद मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है और अब इसकी मजिस्ट्रियल जांच कराए जाने के आदेश दिए गए हैं। घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि पथरी के इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उनकी जान गई। उनका कहना है कि मरीज की स्थिति बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित इलाज नहीं दिया गया और डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। परिजनों ने यह भी दावा किया कि अस्पताल ने स्थिति को छिपाने की कोशिश की, जिससे उनका आक्रोश और बढ़ गया।

वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कांस्टेबल की मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है और इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। प्रबंधन का कहना है कि मरीज को आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी गई थी और अचानक आई हृदयाघात की स्थिति के चलते उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के चलते मामला उलझता जा रहा है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने निष्पक्ष जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए हैं।

मजिस्ट्रियल जांच के तहत पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जाएगी, जिसमें अस्पताल के रिकॉर्ड, डॉक्टरों और स्टाफ के बयान, इलाज की प्रक्रिया और मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का विश्लेषण किया जाएगा। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि वास्तव में मौत का कारण क्या था और कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या दोष पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और पुलिस विभाग में भी शोक और आक्रोश का माहौल है। कांस्टेबल की असामयिक मौत ने उनके साथियों और परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। साथ ही, यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को भी उजागर करता है। अब सभी की नजरें मजिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।

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