गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर संसद भवन में श्रद्धांजलि अर्पित, कई गणमान्य रहे उपस्थित
त्वरित खबरें (अरुन रेपोर्टिंग )

नई दिल्ली,  स्थित संसद भवन के संविधान सदन में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक गौरव से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश की महान साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए कई गणमान्य व्यक्तियों ने गुरुदेव को पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में राज्यसभा की पश्चिम बंगाल से सांसद सिंघारीका घोष, पूर्व सांसद राकेश सिन्हा, पूर्व सांसद प्रदीप गांधी तथा लोकसभा के सेक्रेटरी जनरल उत्पल कुमार सिंह सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी ने गुरुदेव टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को देश के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक महान कवि ही नहीं थे, बल्कि वे भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों के प्रतीक थे। उनकी रचनाओं ने भारतीय समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। गुरुदेव ने साहित्य, संगीत, शिक्षा और कला के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आज भी पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक है। उनके द्वारा रचित भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” देशवासियों में राष्ट्रीय एकता और गर्व की भावना जगाता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि टैगोर के विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में थे।

संविधान सदन में आयोजित इस कार्यक्रम का वातावरण बेहद गरिमामय और भावनात्मक रहा। उपस्थित लोगों ने गुरुदेव के साहित्यिक योगदान, मानवता के प्रति उनके दृष्टिकोण और शिक्षा के क्षेत्र में उनके प्रयासों को याद किया। शांतिनिकेतन की स्थापना से लेकर भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में टैगोर की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों ने कहा कि नई पीढ़ी को गुरुदेव के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है, ताकि समाज में प्रेम, शांति और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत किया जा सके।

इस अवसर पर संसद भवन परिसर में मौजूद लोगों ने भी गुरुदेव टैगोर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपरा के प्रति सम्मान को और अधिक मजबूत करने का संदेश दिया। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में उनकी अमर विरासत को याद करने का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बन गया।

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