रायपुर - छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अमानक चावल का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। इस विषय को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गरीबों को वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। विपक्षी विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई जिलों में हितग्राहियों को घटिया और अमानक चावल दिया जा रहा है, जिससे न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है बल्कि सरकार की योजनाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो रही है। विपक्ष ने इस मामले में खाद्य मंत्री से स्पष्ट जवाब और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए विपक्ष ने कहा कि राशन दुकानों के माध्यम से जो चावल वितरित किया जा रहा है, उसकी गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर चावल में कीड़े मिलने, खराब गुणवत्ता होने और खाने योग्य न होने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। विपक्ष का कहना था कि सरकार गरीबों को राहत देने के लिए राशन योजना चला रही है, लेकिन अमानक चावल वितरण से यह योजना सवालों के घेरे में आ गई है। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और आपूर्ति व्यवस्था की ठीक से निगरानी नहीं की जा रही है।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए खाद्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण चावल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि चावल की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है और जहां भी शिकायतें मिलती हैं, वहां तत्काल जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि किसी स्थान पर अमानक चावल मिलने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विपक्ष को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और हितग्राहियों को बेहतर गुणवत्ता का राशन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
हालांकि खाद्य मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्षी विधायकों ने मंत्री के जवाब को अधूरा और संतोषजनक नहीं बताते हुए सदन में विरोध जताया। इस दौरान सदन में कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। अंततः विरोध दर्ज कराते हुए विपक्षी सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का कहना था कि जब तक इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई और स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता, तब तक वे इस मामले को उठाते रहेंगे। वहीं, विपक्ष के वॉकआउट के बाद विधानसभा की कार्यवाही आगे जारी रही।

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