छत्तीसगढ़ में बढ़ने लगी गर्मी: तापमान सामान्य से 2–3° ज्यादा, कुछ दिनों में 4° तक बढ़ने के आसार
त्वरित ख़बरें : ज़ाफ़रान खान रिपोर्टिंग

रायपुर  छत्तीसगढ़ में लापता बच्चों का मामला लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 982 बच्चे लापता हुए थे, जिनमें से 582 बच्चों को पुलिस और प्रशासन की कोशिशों से बरामद कर लिया गया है, लेकिन अब भी करीब 400 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह आंकड़ा न केवल प्रशासन के लिए बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गया है। पुलिस विभाग के अनुसार लापता बच्चों की तलाश के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। कई मामलों में बच्चों को दूसरे राज्यों से भी बरामद किया गया है। पुलिस की विशेष टीमें बनाकर विभिन्न जिलों और संभावित स्थानों पर तलाश अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है ताकि लापता बच्चों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कई बच्चे घर से नाराज होकर या किसी के बहकावे में आकर घर छोड़ देते हैं, जबकि कुछ मामलों में मानव तस्करी जैसी आशंकाएं भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सरकार और पुलिस प्रशासन का कहना है कि लापता बच्चों की तलाश उनकी प्राथमिकता में है और हर संभव प्रयास किया जा रहा है। कई मामलों में बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया भी गया है, लेकिन अब भी 400 बच्चों का पता नहीं चल पाना चिंता की बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए समाज और परिवार की भी अहम भूमिका है। अभिभावकों को अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए। साथ ही स्कूलों और समाज में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को कम किया जा सके।

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