26 फरवरी 2023
राजनांदगांव। ग्राम मुड़पार में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के समापन दिवस पर कथा वाचक भागवताचार्य पंडित होमेंद्र प्रसाद दुबे ने गीता सार की कथा सुनाते हुए कहा कि 18 अध्याय के गीता का श्रवण करें मन को दिव्य दृष्टि कहा गया है, भीतर के आंख को खोलें। दुनिया के लिए आंख खोलकर चल रहे हैं लेकिन हमारे भीतर के आंख बंद है उसे खोलना है, दिव्य दृष्टि से अब आंख खोलो वही दिव्य दृष्टि है।
कथावाचक भागवताचार्य पंडित होमेंद्र प्रसाद दुबे ने गीता सार कथा सुनाते हुए आगे बताते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता सार सुनाई ।गीता सार यह कथा पूरे संसार के लिए है। प्रेम, मोह, ममता को छोड़ना पड़ेगा, ना कुछ तेरा है ,ना कुछ रहेगा यह संसार का कोई भी चीज तुम्हारा नहीं है। जीवन में अमर कोई नहीं है। उठो और अपनी आंखें खोलो। श्री कृष्ण ने अर्जुन को कहा की संसार में हर व्यक्ति को अपना अपना कर्म सबको करना पड़ेगा। हानि लाभ, जन्म मरण ,सुख-दुख कर्म के लेख भगवान की है।अपने कायरता को छोड़ें, मन से कमजोर व्यक्ति कभी आगे नहीं बढ़ सकता। मन को छोटा कभी ना करें ।मन हमारे शक्तियों को प्रबल बना देती है।लगन ,मेहनत, समय तीनों जब मिल जाए तो जीवन में हर चीज में कामयाबी मिल जाती जाती है। माया के शोक मोह ना करें ,सत्य के मार्ग पर चलने वाले कभी कमजोर नहीं होता, हर जगह सुख शांति आनंद मिलेगा। सफलता की सीढ़ी सत्कर्म करना है। अज्ञानता और विकारों को अपने जीवन से दूर करें अपने अंदर को साफ रखें कथनी और करनी में अंतर ना करें ।

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