राजनांदगांव के शंकरपुर स्थित सामाजिक भवन में पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाज के वरिष्ठजन, युवा, महिलाएं और बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन समाज की एकता, सांस्कृतिक विरासत और लोकमाता के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। समारोह में उपस्थित लोगों ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन और उनके द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर केवल एक कुशल शासक ही नहीं थीं, बल्कि समाज सेवा, न्यायप्रियता, धर्म और संस्कृति के संरक्षण की भी अद्वितीय प्रतीक थीं। उनके शासनकाल में विकास, जनहित और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। वक्ताओं ने कहा कि आज भी उनका जीवन और कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं तथा नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से सीख लेने की आवश्यकता है।
समारोह में शंकरपुर क्षेत्र की पार्षद अपूर्वा श्रीवास्तव विशेष रूप से शामिल हुईं। इस दौरान क्षेत्रवासियों ने उनके समक्ष पेयजल संकट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं रखीं। नागरिकों ने बताया कि क्षेत्र में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए पार्षद श्रीवास्तव ने क्षेत्र में लेट बाथ (स्नानघर) और बोरिंग स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी देने की सहमति प्रदान की। उन्होंने आश्वासन दिया कि आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही इन कार्यों को शुरू कराया जाएगा, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।
इसके साथ ही समाजजनों द्वारा लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी रखी गई। इस प्रस्ताव पर भी पार्षद ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए अपनी सहमति प्रदान की। प्रतिमा स्थापना की मंजूरी मिलने से समाज के लोगों में उत्साह का माहौल देखा गया। उपस्थित नागरिकों और समाजजनों ने पार्षद के सहयोग और जनहितकारी निर्णयों का स्वागत करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने सामाजिक एकता, शिक्षा, संस्कार और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। सभी ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के बताए मार्ग पर चलने और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प दोहराया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ, लेकिन समाजजनों के मन में लोकमाता के आदर्शों और क्षेत्र के विकास को लेकर नई ऊर्जा और उत्साह का संचार देखने को मिला।

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