व्यक्ति का छात्र जीवन सबसे अच्छा होता है। विद्यार्थी जब पढ़ता है तब उसे पढ़ाई के अलावा अन्य किसी बात की चिंता नहीं रहती है, लेकिन पढ़ते हुए सभी की सोच रहती है कि हम एक, सफल इंसान बनें। बड़े होकर जीवन कितना सुखमय होगा, लेकिन व्यक्ति जब विद्यार्थी जीवन पार कर अपने मुकाम तक पहुंचता है, तब उसे पुराने दिन याद आते हैं और पता चलता है कि उससे बेहतर कुछ हो ही नहीं सकता।
यह बातें शासकीय उमा शाला जामगांव एम में हुए गुरु-शिष्य सम्मेलन में शाला के भूतपूर्व छात्रों ने कहीं। शाला में साल 1988 से 2001 तक पढ़े विद्यार्थी परिवार सहित शामिल हुए। इनमें लोक अभियोजक शिवलहरी, दंतेवाड़ा टीआईं अश्वनी सिन्हा सहित बहुत से पूर्व छात्र शामिल हुए। सभी ने मिलकर अपने पुराने साथ बिताए हुए दिनों को याद किया। आयोजन समिति के शुभम वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में सभी ने अपने अनुभव साझा किए। शाला के वरिष्ठ शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम तीन वर्ग में हुआ। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी।
जर्जर स्कूल को सहेजने का भी की जाएगी पहल
आयोजन समिति के अध्यक्ष विनोद वर्मा व पूर्व प्राचार्य टीकम चंद्राकर, चंद्रभूषण बगरिया, अजय शर्मा, डॉ. दुलारी चंद्राकर, अनीता चंद्राकर आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। फत्तूलाल ठाकुर ने बताया कि जिस भवन में हम लोग पढ़े हैं, वह टूटने लगा है। इसे सहेजने भी छात्रों ने पहल का निर्णय लिया। कार्यक्रम में बीआर जोगी, केबी पाल, एसके शर्मा, बीआर पटेल, एआर चंद्राकर, संगीता दास, लोकमनी चंद्राकर, गजानंद सिन्हा, यशवंत आदिल, विनोद आदि शामिल हुए।