कोरोना के प्रकोप के बाद गर्भवतियों को लगने वाले टिटनेस टीके में लगातार गिरावट आ रही है। कोरोना आने से पहले जिला अस्पताल में इस टीके की पहली खुराक हर साल औसतन 600 गर्भवतियों को लगती रही। साल 2020 में कोरोना आने के बाद इसकी संख्या घटती जा रही है।
2019 में दुर्ग जिला अस्पताल में अप्रैल से अगस्त के बीच कुल 698 गर्भवतियों ने टिटनेस के टीके की पहली खुराक ली थी। इसके अगले साल इनकी संख्या 447 रह गई। इस साल मात्र 226 गर्भवतियों ने जिला अस्पताल में टिटनेस के टीके की पहली खुराक लगवाई है। पहली खुराक में ही नहीं इसी प्रकार की गिरावट टिटनेस के टीके की दूसरी और बूस्टर डोज में भी देखने को मिली है।
बीसीजी का टीका कोरोना काल में ज्यादा लगा
बच्चों को टीबी व खसरा से बचाने वाला बीसीजी टीका पिछले साल बढ़ गया था। जिला अस्पताल में तीन वर्षों में अधिकतम 3222 बच्चों ने टीका लगवाया। इस साल इस टीके की संख्या घटकर 2869 हो गई है।
निजी अस्पतालों में टिटनेस के टीके लगवाने पहुंच रहीं महिलाएं
सरकारी अस्पताल में गर्भवतियों को लगाए जाने वाले टिटनेस की टीका संख्या में कमी होने से टीका नहीं लगने की आशंका है। अधिकतम गर्भवतियां सरकारी अस्पतालों में ही टीका लगवाती हैं। वर्तमान में कोरोना का प्रकोप कम होने से अस्पताल खुल गए हैं। यह संख्या बढ़ने के विपरीत कम हो रही है। वहीं गर्भवती महिलाएं निजी अस्पतालों में टीके लगवाना पसंद कर रही हैं।
गर्भवतियों को टिटनेस का टीका लगना जरूरी क्यों
टिटनेस बैक्टीरिया से होने वाला एक गंभीर संक्रमण है। संक्रमण से मांसपेशियों में ऐंठन पैदा होती है। इसमें मृत्यु भी हो जाती है। यह तंत्रिकाओं पर असर करता है। इसलिए दोनों डोज जरूरी है।
रूटीन टीकाकरण में पहुंच रहे अब ज्यादा बच्चे
कोरोना प्रकोप कम होने से जिले में बच्चों के रूटीन टीकाकरण ने गति पकड़ ली है। जिला अस्पताल में इस साल 8660 बच्चों की जगह 8878 बच्चों ने टीका लगवाया है। जबकि इससे पहले 8910 बच्चे हर साल टीका लगवाते रहे हैं।
टिटनेस के टीके पर विशेष तौर पर फोकस कर रहे
जिला अस्पताल में गर्भवतियों के टिटनेस के टिके में गिरावट मिली है। इसलिए हमने कर्मियों को इसकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस उद्देश्य से अब हर गर्भवती का रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया गया है।
-डॉ. सीबीएस बंजारे, जिला टीकाकरण अधिकारी, दुर्ग।