नगर निगम भिलाई क्षेत्र की सफाई व्यवस्था का काम देखने वाली एजेंसी के खिलाफ बैठी जांच अभी तक किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। जबकि मामले में शासन की दखल के बाद निगम से लेकर लेबर डिपार्टमेंट तक ने अपने-अपने स्तर पर कमेटियां गठित की। लेकिन उस घोषणा को भी 20 दिनों से भी ज्यादा समय बीत चुका है। जांच का अता पता नहीं है।
स्थिति यह है कि जिस एजेंसी के खिलाफ गलत तरीके से ठेका लेने की शिकायत हुई। मजदूरों के वेतन भुगतान से लेकर पीएम, ईएसआई और लेबर लाइसेंस में गड़बड़ी की बात सामने आई, उसे अफसर बचाने में लगे हैं। यह पूरा मामला तत्कालीन आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के कार्यकाल में हुआ। तब आयुक्त ने एजेंेसी के खिलाफ कोई कड़े कदम नहीं उठाए। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच के लिए निगम और श्रम विभाग समेत अन्य विभागों ने टीम तो बनाई, लेकिन उस पर 20 दिन बाद भी अमल नहीं हो पाया। बड़ी बात यह है कि जिस एजेंसी की जांच होनी है, उसका ठेका भी अगले 13 दिनों में खत्म होने वाला है। ठेका एजेंसी ने बिना रोकटोक के 11 महीने का काम भी पूरा कर लिया है। इसे लेकर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इधर नगर निगम ने नए सफाई ठेका के लिए दूसरी बार टेंडर भी निकाल दिया है। 27 अक्टूबर तक मियाद रखी गई है।
11 महीने से शिकायत टालते रह गए अफसर
निगम क्षेत्र में सफाई का काम करने वाली कंपनी के खिलाफ बीते 11 माह से लगातार शिकायतें की जाती रही। पिछले नवंबर में ठेका मिलने के बाद जनवरी में बिना लेबर लाइसेंस के ठेका संचालित करने की शिकायत हुई। मामले में कार्रवाई की जगह निगम अधिकारी शिकायत को अनसुना करते रहे। कंपनी आठ महीने तक बिना लाइसेंस के काम करती रही। श्रम विभाग ने कंपनी का भुगतान रोकने का आदेश जारी कर दिया। तब कंपनी ने 12.5 लाख रुपए जमा कर लेबर लाइसेंस लिया।
कमेटी तो बनाई, जांच कहां पहुंची पता नहीं
8 महीने तक कंपनी बिना लेबर लाइसेंस के निगम से भुगतान लेती रही। इस बीच निगम कार्यालय से लेकर श्रम विभाग में लगातार शिकायतें होती रही। जब मामले ने तूल पकड़ा तो खुद निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने एसई यूके धुलेंद्र, एओ जितेंद्र ठाकुर, उपायुक्त नरेंद्र कुमार बंजारे की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की। वर्तमान में स्थिति यह है कि करीब 20 दिन गुजरने के बाद भी कमेटी अभी तक किसी नतीजे तक पहुंच नहीं सकी है। यही हाल लेबर डिपार्टमेंट की जांच में है।
अब कार्यकाल पूरा होने का इंतजार कर रहे
सफाई ठेका कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतों के बाद भी निगम अधिकारी उसे बचाने में लगे हैं। स्थिति यह है कि कंपनी का कार्यकाल समाप्त होने के चंद दिनों पहले शिकायतों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। इसी बीच दूसरी बार टेंडर के लिए निविदा जारी कर दी गई है। जानकारों का कहना है कि यह सभी प्रक्रिया शिकायतकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए की गई है। नई कंपनी का चुनाव होने के बाद चर्चाओं पर अपने आप विराम लग जाएगा।
सीधी बात; धमेंद्र मिश्रा, स्वास्थ्य प्रभारी, नगर निगम भिलाईकमेटी आयुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपेगी
बिना लेबर लाइसेंस के कंपनी इतने समय तक कैसे काम करती रही?
कंपनी ने एप्लाई किया था। कोरोना की वजह उस दौरान लाइसेंस नहीं मिल सका।
फिर लेबर डिपार्टमेंट को भुगतान रोकने के लिए क्यों आदेश देने पड़े?
उनके आदेश पर ही पेमेंट रोका गया और उनके आदेश रिलीज भी किया गया।
जांच कमेटी की रिपोर्ट कहां है?
कमेटी जांच करके आयुक्त को रिपोर्ट सौंपेगी। मेरा रोल नहीं है।
रूपभ श्रीवास्तव, मैनेजर, ग्रीन नेचर कंपनी
कोरोना की वजह से लाइसेंस में देरी हुई
कर्मचारियों को पीएफ व ईएसआई का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा?
हर माह नियमित रूप से जमा किया जा रहा है। दस्तावेज उपलब्ध करा सकते हैं।
फिर जिला प्रशासन से लेकर शासन तक कंपनी की शिकायत क्यों हुई ?
आरोप कोई भी लगा सकता है। हम कैसे किसी को रोक सकते हैं।
लेबर डिपार्टमेंट ने आदेश दिया?
कोरोना की वजह लाइसेंस मिलने में देरी हुई थी।
जानिए, सफाई ठेका के बाद से कब क्या-क्या विवाद सामने आया
- दूसरे शहर में कंपनी के ब्लैक लिस्ट होने का दावा किया गया पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
- लेबर डिपार्टमेंट से लेबर लाइसेंस लिए बिना काम करती रही। निगम ने जानकारी तक नहीं ली।
- कर्मचारियों की शिकायत सुनने के लिए दफ्तर नहीं बनाया गया। मजदूरों को लौटाते रहे।
- कंपनी का भुगतान रोकने के आदेश पर निगम ने जारी की राशि, लेकिन कार्रवाई नहीं की।
- टेंडर लेते समय 3 करोड़ टर्नओवर का सार्टिफिकेट नहीं दिया, फिर अनदेखी की गई।