राजनांदगांव 9 घंटे पहले
टेड़ेसरा का बीपीओ आरोहण....। जल्द ही यहां 2 हजार सीटों के साथ मध्य भारत का सबसे बड़ा कॉल सेंटर बनाया जा रहा है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। वर्तमान में देश की मल्टीनेशनल कंपनियों के कस्टमर के कॉल यहीं से लिए जा रहे हैं। उनका समाधान इसी सेंटर से हो रहा है।
इस सेंटर में कभी 60 युवाओं ने काम शुरू किया था। अब तक दो हजार युवाओं को रोजगार दिया जा चुका है। जबकि एक समय में काम करने वालों की संख्या वर्तमान में एक हजार 87 तक जा पहुंची है। इस सेंटर की वजह से ही टेड़ेसरा और आसपास के गांवों में आर्थिक लाभ भी मिला है। ये मीशो, एनीमॉल, एजीयो, स्वीगी, पशुपल जैसी कंपनियों का कॉल सेंटर है। यहां वॉइस, कैटलॉग और ईमेल के माध्यम से आम लोगों के साथ जुड़कर उनकी सभी शंकाओं का समाधान किया जाता है। लगातार इससे युवा जुड़ते जा रहे हैं।
आसपास के गांवों में नहीं मिलते किराए के मकान
टेड़ेसरा के अलावा आसपास के देवादा और सोमनी सहित कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि अब किराए के मकान नहीं मिलते। कई शहरों से युवा यहां आकर जॉब कर रहे हैं। इस वजह से इन गांवों की आर्थिक गतिविधियां भी बेहतर हुई हैं। स्थिति यह है कि अब तीन से चार हजार रुपए में इन गांवों में एक कमरा मिल पाना मुश्किल है। इसे देखते हुए जॉब कर रहे युवा आसपास के गांवों में किराए के मकान तलाश रहे हैं।
जानिए, यहां काम करने वाले युवाओं के संघर्ष की कहानी...
एडवाइजर से एचआर लीडर बन गई रचना
कोरोना का समय और पिता का व्यवसाय ठप हुआ तो स्टेशन पारा निवासी रचना ठाकुर ने यहां एडवाइजर के बतौर ज्वाइनिंग दी। सिविल इंजीनियरिंग की हुई रचना ने अपने परिवार को संभाला। रचना के स्किल की वजह से उसे एचआर लीडर प्रमोट किया गया।
भाई के बाद बहन ने भी काम संभाला
टेड़ेसरा की छाया सोनी और उसके भाई लक्की ने यहां बतौर एडवाइजर काम शुरू किया था। इसके बाद क्वालिटी कोऑर्डिनेटर तक का काम उन्हें दिया गया। कोरोना की वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। अब वे छह लोगों का परिवार संभाल रहे।
पिता की मौत के बाद खुद संभाला परिवार
डोंगरगढ़ की पायल के पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी पायल पर ही आ गई थी। स्कूल खत्म होने के बाद जॉब की जरूरत थी। प्रोसेस ट्रेनर के बतौर ज्वाइनिंग दी। टेली कॉलर से एडवाइजर तक का सफर तय किया।
ऑफिस ब्वॉय से सॉफ्टवेयर इंजीनियर की राह पर
टेड़ेसरा के शत्रुहन मानिकपुरी शुरुआत में यहां बतौर ऑफिस ब्वाय ज्वाइन किए। घर पर मां और पिता के साथ भाई को संभालने वाले शत्रुहन ने डेस्कटॉप सपोर्ट यहीं से सीखा। कंपनी की ओर से ही उन्हें सॉफ्टवेयर इंजी. का कोर्स कराया जा रहा है।