घरौंदा केंद्रों में न डॉक्टर, न इलाज:दिव्यांग बंधे मिले, हालात अमानवीय; कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट - हफ्ते में 2 बार नहीं हो रही मरीजों की जांच

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छत्तीसगढ़ के घरौंदा केंद्रों में रह रहे दिव्यांगजनों की देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट में केंद्रों की व्यवस्था पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई जगहों पर मरीजों को नियमित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। केंद्रों में न तो पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही समय पर इलाज की व्यवस्था हो पा रही है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मरीजों की सप्ताह में दो बार स्वास्थ्य जांच किए जाने का प्रावधान होने के बावजूद नियमित जांच नहीं हो रही है। कुछ दिव्यांगजनों को बांधकर रखे जाने की स्थिति भी सामने आई है, जिसे अमानवीय बताया गया है।

घरौंदा केंद्रों का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सुरक्षित आवास, देखभाल और बेहतर जीवन उपलब्ध कराना है। लेकिन रिपोर्ट में सामने आई स्थितियां इन केंद्रों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती हैं। मामले में स्वास्थ्य सेवाओं, कर्मचारियों की उपलब्धता और दिव्यांगजनों के साथ व्यवहार को लेकर जवाबदेही तय करने की जरूरत सामने आई है।