रसमड़ा (दुर्ग): जनपद पंचायत दुर्ग के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रसमड़ा में पंचायती राज व्यवस्था के कथित खुले उल्लंघन और महिला आरक्षण की अवहेलना का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत के समस्त युवाओं और जागरूक नागरिकों ने जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को एक लिखित शिकायत सौंपते हुए महिला सरपंच के पति पर गैर-संवैधानिक रूप से 'सुपर सरपंच' बनकर समानांतर सत्ता चलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
बैठकों और दस्तावेजों में मनमानी का आरोप:
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम सभा या पंचायत की सामान्य बैठकों में निर्वाचित महिला सरपंच के स्थान पर उनके पति खुद चर्चा का नेतृत्व करते हैं और सारे फैसले लेते हैं।
पंचायत के निर्माण कार्यों, प्रशासनिक बैठकों और पत्राचार में भी उनका अवैध हस्तक्षेप बना हुआ है।
आधिकारिक पोस्टरों, होर्डिंग्स और दस्तावेजों पर भी निर्वाचित सरपंच के साथ उनके पति अपनी बड़ी तस्वीरें छपवा रहे हैं तथा दस्तावेजों पर हस्ताक्षर व पत्राचार करने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
जनता और सरपंच के बीच दूरी: ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी आम नागरिक या पंचायत प्रतिनिधि को अपनी समस्या को लेकर वास्तविक सरपंच से बात करनी होती है, तो सरपंच पति बीच में आकर उन्हें मिलने से रोकते हैं और निर्णय प्रक्रिया पर एकतरफा नियंत्रण रखते हैं।
कड़ी कार्रवाई की मांग: ग्रामीणों ने इस कृत्य को पंचायती राज अधिनियम और महिला सशक्तिकरण की मूल भावना के खिलाफ बताया है। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने, आधिकारिक बैठकों व दस्तावेजों में सरपंच पति के दखल पर रोक लगाने तथा दोषी सरपंच व उनके पति के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर दुर्ग, अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) दुर्ग और जनपद पंचायत दुर्ग के CEO को भी भेजी गई है।