रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर अब आर्थिक सहायता से आगे बढ़कर स्वरोजगार, उद्यमिता और आधुनिक तकनीक तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में महिलाओं को केंद्र और राज्य की योजनाओं से जोड़कर आय और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। महतारी वंदन योजना, महतारी शक्ति ऋण, लखपति दीदी, नमो ड्रोन दीदी और दीदी ई-रिक्शा जैसी पहलें महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं।
महतारी वंदन से आर्थिक सहारा
महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। सितंबर 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि योजना के माध्यम से करीब 70 लाख महिलाओं के खातों में अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहुंचाई जा चुकी है। यह सहायता महिलाओं को घरेलू जरूरतों के साथ बचत और छोटी आजीविका गतिविधियों में मदद दे सकती है।
सहायता से स्वरोजगार तक
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों और ऋण सुविधाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, सब्जी बिक्री, पशुपालन, मुर्गी पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे छोटे कारोबार ग्रामीण महिलाओं की आय का साधन बन रहे हैं। कई महिलाएं बैंक ऋण और स्वयं सहायता समूहों की मदद से अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘बिहान’ के जरिए छत्तीसगढ़ में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। लखपति दीदी से आशय ऐसी ग्रामीण महिला से है जिसकी वार्षिक घरेलू आय कम से कम एक लाख रुपये है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय आय अर्जित करने वाली उद्यमी के रूप में आगे बढ़ाना है।
ड्रोन से तकनीक तक महिलाओं की पहुंच
महिला सशक्तिकरण में अब तकनीक की भूमिका भी बढ़ रही है। केंद्र की नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि कार्यों के लिए ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण और सहायता दी जा रही है। ड्रोन के जरिए खेतों में उर्वरक और कीटनाशक का छिड़काव जैसी सेवाएं दी जा सकती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार और आय का नया क्षेत्र खुल रहा है।
ई-रिक्शा से रोजगार का अवसर
दीदी ई-रिक्शा जैसी पहलें महिलाओं को परिवहन क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर देती हैं। वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच के साथ ऐसी योजनाएं महिलाओं की नियमित आय के साधन विकसित करने में मदद कर सकती हैं।
कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में महिला-केंद्रित योजनाओं का दायरा आर्थिक सहायता से बढ़कर ऋण, कौशल, तकनीक और उद्यमिता तक पहुंच रहा है। आने वाले समय में इन योजनाओं की बड़ी कसौटी यह होगी कि इनसे जुड़ी महिलाएं कितनी स्थायी आय अर्जित कर पाती हैं और कितने छोटे कारोबार लंबे समय तक टिकाऊ बन पाते हैं। वास्तविक सशक्तिकरण तभी माना जाएगा, जब सहायता अवसर में, अवसर आय में और आय आत्मनिर्भरता में बदल सके।