रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य सरकार पर धान के भंडारण और निस्तारण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने दावा किया कि पिछले खरीफ सीजन का लगभग 15 लाख मीट्रिक टन धान अब भी संग्रहण केंद्रों में खुले में पड़ा है और लगातार हो रही बारिश के कारण उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदे गए धान का समय पर निस्तारण नहीं कर सकी, जिससे लाखों टन धान खुले में पड़ा हुआ है। पार्टी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार पूरे खरीदे गए धान से बने चावल को सेंट्रल पूल में स्वीकार कर ले, तो राज्य को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकता है और धान के निस्तारण की समस्या का समाधान भी हो सकता है।
वंदना राजपूत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान से तैयार पूरा चावल नहीं खरीदे जाने के कारण राज्य सरकार के सामने धान के निस्तारण की समस्या खड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से बड़ी मात्रा में धान संग्रहण केंद्रों और समितियों में पड़ा हुआ है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास किया। पार्टी के अनुसार, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की खरीद, परिवहन और हैंडलिंग सहित धान की लागत लगभग 3822 रुपये प्रति क्विंटल बैठती है, जबकि कथित तौर पर नीलामी का बेस रेट 1900 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया। इसके बावजूद पूरा धान नीलाम नहीं हो सका और बड़ी मात्रा में धान अब भी सोसाइटियों में पड़ा हुआ है।