उद्योगपति Anil Ambani को ब्लैक मनी एक्ट से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। बुधवार, 10 जून 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) प्रदान करते हुए आयकर विभाग को फिलहाल उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या अभियोजनात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया।
मामला ब्लैक मनी (Undisclosed Foreign Income and Assets) एवं इम्पोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015 से जुड़ा है। अनिल अंबानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस कानून की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि संबंधित प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं हैं और उन्हें अनुचित रूप से लागू किया जा रहा है।
बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि जब तक इस संवैधानिक चुनौती पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक अनिल अंबानी के खिलाफ कोई “कोएर्सिव एक्शन” यानी जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संरक्षण में अभियोजन (Prosecution) और जुर्माना (Penalty) जैसी कार्रवाइयां भी शामिल हैं।
यह मामला नया नहीं है। आयकर विभाग ने पहले भी अनिल अंबानी पर विदेशी संपत्तियों और खातों के कथित खुलासे न करने को लेकर कार्रवाई शुरू की थी। विभाग का आरोप रहा है कि विदेशी खातों में रखी गई बड़ी राशि का सही विवरण नहीं दिया गया, जिससे कर चोरी का मामला बनता है। इसी आधार पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत नोटिस जारी किए गए थे।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में भी अनिल अंबानी को इसी मामले में अंतरिम राहत मिलती रही है। 2022 और 2023 में भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर विभाग को उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने से रोका था और मामले की सुनवाई जारी रखी थी।
ताजा आदेश के बाद फिलहाल अनिल अंबानी को राहत मिल गई है, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। अब अदालत ब्लैक मनी एक्ट की संबंधित धाराओं की संवैधानिक वैधता पर विस्तृत सुनवाई करेगी। यदि अदालत भविष्य में याचिका खारिज करती है तो विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है, जबकि याचिका स्वीकार होने की स्थिति में मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
इस फैसले को देश के कॉर्पोरेट और कानूनी जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह केवल अनिल अंबानी तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लैक मनी एक्ट की कुछ धाराओं की संवैधानिक समीक्षा से भी जुड़ा हुआ है। अदालत का अंतिम निर्णय भविष्य में ऐसे कई मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।