30 लाख रुपए के कर्ज ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। बेहतर कमाई और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर रूस गए रमैया की अब केवल यादें ही बची हैं। विदेश जाकर मेहनत करने और कर्ज चुकाने की उम्मीद लेकर निकला युवक ताबूत में वापस लौटा तो पूरे गांव में मातम छा गया। बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रमैया की मां ने रोते हुए कहा कि एक फोन कॉल ने उनका पूरा परिवार बिखेर दिया। जिस बेटे को उम्मीदों के साथ विदेश भेजा था, उसकी मौत की खबर ने जिंदगी बदल दी। परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है कि आखिर रमैया की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
परिजनों के मुताबिक रमैया पर करीब 30 लाख रुपए का कर्ज था। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी और इसी वजह से उसने विदेश जाकर काम करने का फैसला लिया था। एजेंटों ने उसे बेहतर नौकरी और अच्छी सैलरी का सपना दिखाया था। परिवार ने जमीन गिरवी रखकर और रिश्तेदारों से उधार लेकर उसे रूस भेजा था। शुरुआत में रमैया का परिवार से नियमित संपर्क होता रहा, लेकिन कुछ समय बाद बातचीत कम हो गई। फिर अचानक एक दिन परिवार को फोन आया कि रमैया की हालत गंभीर है। इसके बाद जो खबर मिली उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। परिवार को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है और शव भारत भेजा जाएगा।
गांव में जैसे ही शव पहुंचा, हर आंख नम हो गई। लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा हो गई और परिवार को सांत्वना देने वालों का तांता लग गया। मां बार-बार बेटे की तस्वीर देखकर रो पड़ती है और कहती है कि वह केवल घर की जिम्मेदारियां कम करना चाहता था। पिता और अन्य परिजन भी सदमे में हैं। परिवार का आरोप है कि विदेश भेजने वाले एजेंटों ने सही जानकारी नहीं दी और उन्हें कई बातों से अनजान रखा गया। अब परिवार सरकार से मामले की जांच और आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भी परिजनों से मुलाकात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है।
इस घटना के बीच एक और चिंता की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार मॉस्को में अभी भी दो भारतीय युवक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे भी रोजगार के सिलसिले में रूस गए थे और गंभीर परिस्थितियों में फंस गए। उनके परिवार लगातार भारत सरकार और दूतावास से संपर्क में हैं। परिजन अपने बेटों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं। विदेशों में रोजगार के नाम पर युवाओं को भेजने वाले एजेंटों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में कर्ज लेकर अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं, लेकिन कई बार यह फैसला उनके लिए भारी साबित हो जाता है।
रमैया की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांव के लोग अब युवाओं को विदेश भेजने से पहले पूरी जानकारी और सतर्कता बरतने की बात कह रहे हैं। सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से मांग की है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और फर्जी एजेंटों पर सख्त कार्रवाई हो। यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं बल्कि उन हजारों परिवारों की चिंता को सामने लाती है, जो गरीबी और कर्ज से बाहर निकलने के लिए अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं। रमैया का सपना था कि वह मेहनत करके परिवार को बेहतर जिंदगी देगा, लेकिन उसकी मौत ने पीछे केवल आंसू, कर्ज और अधूरे सपने छोड़ दिए।