रायपुर छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस विधायक Devendra Yadav ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर आयोजित प्रदर्शन के दौरान विवादित बयान देते हुए कहा कि “जेल जाओगे तो सांसद-विधायक बनोगे।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। दरअसल, छात्र संगठन NSUI ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया था। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार पर छात्र हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने से बच रही है, क्योंकि उसे युवाओं के विरोध और हार का डर सता रहा है। इसी दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए देवेंद्र यादव ने संघर्ष और आंदोलन की राजनीति का जिक्र करते हुए यह बयान दिया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। संगठन का कहना है कि छात्र राजनीति युवाओं को नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी का अनुभव देती है, लेकिन सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखते हुए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया।
देवेंद्र यादव के बयान को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। सत्तापक्ष का कहना है कि कांग्रेस के नेता युवाओं को उकसाने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और इसका उद्देश्य केवल संघर्ष की राजनीति को समझाना था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है, क्योंकि युवाओं का एक बड़ा वर्ग इससे जुड़ा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग देवेंद्र यादव के बयान की आलोचना कर रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे आंदोलनकारी राजनीति का प्रतीक बता रहे हैं। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस विधायक Devendra Yadav ने छात्रसंघ चुनाव को लेकर आयोजित प्रदर्शन के दौरान विवादित बयान देते हुए कहा कि “जेल जाओगे तो सांसद-विधायक बनोगे।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया और सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। दरअसल, छात्र संगठन NSUI ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया था। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने राज्य सरकार पर छात्र हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने से बच रही है, क्योंकि उसे युवाओं के विरोध और हार का डर सता रहा है। इसी दौरान छात्रों को संबोधित करते हुए देवेंद्र यादव ने संघर्ष और आंदोलन की राजनीति का जिक्र करते हुए यह बयान दिया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।
NSUI कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं, जिससे युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। संगठन का कहना है कि छात्र राजनीति युवाओं को नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी का अनुभव देती है, लेकिन सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प की स्थिति भी बनी। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखते हुए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया।
देवेंद्र यादव के बयान को लेकर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। सत्तापक्ष का कहना है कि कांग्रेस के नेता युवाओं को उकसाने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बयान को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और इसका उद्देश्य केवल संघर्ष की राजनीति को समझाना था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है, क्योंकि युवाओं का एक बड़ा वर्ग इससे जुड़ा हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग देवेंद्र यादव के बयान की आलोचना कर रहे हैं, जबकि उनके समर्थक इसे आंदोलनकारी राजनीति का प्रतीक बता रहे हैं। फिलहाल छात्रसंघ चुनाव को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है, लेकिन विपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।