''संस्कृति भारतीयों के लिए गौरव का विषय''

त्वरित खबरें- नागेशवरी वर्मा रिपोर्टिनग

 राजनांदगांव :- संस्कृतभारती, राजनांदगांव के आशियाने में दस दिवसीय दीक्षांत समारोह का समापन गांधीगृह में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मधुसूदन यादव जी ने कहा कि संस्कृत सहज सहज, सरल सहज और मधुर कोई भाषा नहीं है। विकसित भारत की परिकल्पना में संस्कृत का योगदान महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अध्यक्ष अशोक चौधरी जी ने संस्कृत में आशुतोष जीवन परिचय के बारे में बताया। विशिष्ट अतिथि शैंकी बग्गा जी ने कहा कि संस्कृत भाषा आत्मगौरव भारतीय व्यवस्था एवं भारतीय समाज में परंपरा श्रद्धा एवं संस्कार की भाषा है। मुख्य वक्ता सुशील कोठारी ने कहा कि भारत के चहुँओर विकास में संस्कृत भाषा का योगदान महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्कृत ही वसुधैव कुटुम्बकम् का चरितार्थ करती है।संस्कृतभारती के जिला मंत्री डाॅ. 62 शिविरार्थी ने बताया कि शिविर में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। संस्कृत में दर्शन को प्रगट करने की अद्भुत क्षमता है। संभाषण शिविर का उद्देश्य संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. शंकरमुनि राय द्वारा किया गया। समापन कार्यक्रम में जिला शिक्षण प्रमुख निकोलाग्रग्रथ, जिला प्रचार प्रमुख शशीनाथ तिवारी, नरेंद्र धमगेश्वर श्रीमती लता देवांगन, संतोष वर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।