कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मान. जानकी रंगारी पूर्व शिक्षा अधिकारी, विशिष्ट अतिथि मान. कन्हैयालाल खोब्रागढ़े वरिष्ठ समाजसेवी राजनांदगांव, डॉ.बी. नंदा जागृत प्राध्यापक शा. दिग्विजय महा.वि. राजनांदगांव, मान. नंदा मेश्राम प्रदेश उपाध्यक्ष महिला सशक्तिकरण संघ छ.ग., डॉ. अर्चना रंगारी डायरेक्टर शुक्ला मेडी सीटी हॉस्पिटल राज., डॉ. सुजाता वासनिक गायनो. डायरेक्टर श्रीराम हास्पिटल राज, मान. प्रभा कुटारे अध्यक्ष महिला मंडल राहुल नगर, डॉ. संध्या दामले संरक्षक एम.एस.एस, मान. मधुकर मेश्राम सभापति राहुल नगर, मान. सुशांत कुमार, सम्पादक दक्षिण कौशल, मंचस्थ अतिथि थे।
सर्वप्रथम संविधान की प्रस्तावना का वाचन सुनिता ईलमकार (कोषाध्यक्ष) द्वारा किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में राजनांदगांव जिला अध्यक्ष महिला सशक्तिकरण संघ बुद्धिमित्रा वासनिक के द्वारा बीज वक्तव्य दिया गया जिसमें महिला सशक्तिकरण संघ के उद्देश्य बताये एवं आनागारिक धम्मपाल जयंती एवं पेरीयार रामास्वामी जयंती में आये हुए अतिथियों को बधाई दी।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि मान. जानकी रंगारी ने अनागारिक धम्मपाल जयंती एवं पेरियार रामास्वामी की बधाई देते हुए कहा कि पेरयार जी ने भगवान, ईश्वर की सत्ता को बिल्कुल स्वीकार नही किया। आरती, ढोल नगाड़ो की आवाज को सुन सकता है महिलाओं की चीख वो दर्दभरी आवाजे कैसे नही सुन सकता। उनकी सहायता क्यों नही करता नास्तिक बनने के लिए साहस, ढृंढ संकल्प, बुद्धि और शिक्षा की आवश्यकता होती है, उन्होंने शिक्षा, विज्ञान पर जोर दिया। कोई व्यक्ति तभी क्रांतिकारी बनता है जब उसे अपमान, तिरस्कार, घृणा और अवहेलना मिलती है ये उन्हें मिली। मानव का मानव होना ही पर्याप्त है। जातिगत सूचक शब्दों से उसको अपमानित करना मानव होने की अवहेलना है। कन्हैया खोब्रागढ़े जी ने अनागारिक धम्मपाल की जीवनी एवं बौद्ध धर्म के लिए किए कार्यो को बताते हुए कहा कि १८९३ में विश्वधर्म सम्मेलन में बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व किया और अपने भाषण के समय में से समय देकर स्वामी विवेकानंद जी को बोलने का अवसर दिया। सारनाथ में धर्मराजिका स्तूप का संरक्षण उनकी देखरेख में हुआ तक्षशिला से मिले बुद्ध अस्थि अवशेष को स्तूप में रखवाया।
डॉ. बी नंदा . जागृत ने कहा कि अनागारिक धम्मपाल श्रीलंका के ये फिर भी उन्होंने भारत में बौद्ध धर्म के पुनरउत्थान के लिए महती कार्य किया जिससे यहा के लोगों को प्रेरणा लेनी चाहिए। पेरियार के विचार और कार्य हमेशा प्रासंगिक रहेंगे।
नंदा मेश्राम जी ने महिला सशक्तिकरण संघ के कार्यो को बताया एवं कहा कि इंसान की पहचान उनके कार्यो से होती है। वक्ता के रूप में पुनम कोल्हाटकर जी ने अपने ओजस्वी अंदाज में आनागरिक धम्मपाल जी एवं पेरियार जी के मानव समाज के लिए किये गये कार्यो को बड़ेे ही अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पेरियार जी द्वारा लिखित सच्ची रामायण हर व्यक्ति को पढऩी चाहिए। सभी अतिथियों ने बारी बारी से अपना उदबोधन दिया हमारे बीच बालवक्ता नन्हा ६ वर्ष का बालक यर्थाथ सम्राट भारतीय ने सावित्री बाई फूले एवं शिक्षक माता पिता के बारे में बच्चों से कहा हमें उनका आदर करना चाहिए। उनका जोशिला अंदाज देखने सुनने के लायक था। अंत में कहा अक्षर अक्षर हमें सिखाते, सब शब्दों का अर्थ बताते कभी प्यार से कभी डांट से जीवन जीना हमें सिखाते।
कार्यक्रम में बौद्ध समाज के वरिष्ठ और अम्बेडकर मिशन के ध्वजवाहक , धम्मप्रचारक कन्हैयालाल खोब्रागढ़े जी को शाल पौधा तथा प्रशंसा पत्र देकर महिला सशक्तिकरण संघ द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सभी अतिथियों को प्रशंसा पत्र एवं पौधा देकर सम्मानित किया गया। पत्रकारिता के क्षेत्र में
उल्लेखनीय कार्य के लिए दक्षिण कौशल के सम्पादक सुशांत कुमार को प्रशंसा पत्र तथा पौधा देकर सम्मानित किया गया। यर्थाथ को पौधा एवं प्रशंंसा पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन रविता लकड़ा ने किया एवं आभार प्रदर्शन हर्षिका गजभिए उपाध्यक्ष एम.एस.एस. एवं सुनीता ईलमकर ने किया।
कार्यक्रम में सविता जामुलकर, वंदना बोरकर, माया खोब्रागढ़े, मीना खोब्रागढ़े, शिल्पा कोल्हाटकर, सरिता रामटेके, अनीता बोरकर, आशा जामुलकर, मीनाक्षी मेश्राम, वीना वासनिक, आशा गढ़पायले, सुधा खापर्डे, सुभाष गजभिये, कमल किशोर भोईर, संदीप कोल्हाटकर, संजय हुुमने, मोहन डोंगरे, पंचशीला रंगारी, माया गजभिये, रेणुका भोईर, ज्योत्सना, गीता, आशा कोल्हाटकर, शीला रंगारी, अर्पित आदि उपस्थित थे। यह जानकारी बुद्धिमित्रा वासनिक अध्यक्ष महिला सशक्तिकरण संघ द्वारा दिया गया।