राजनादगांव- ग्रामीण क्षेत्र के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की सीटों को भरने बच्चे नहीं मिल रहे हैं। बच्चों का एडमिशन कराना शिक्षा विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसका प्रमुख कारण यह है कि ग्रामीण इलाकों के बच्चे पहले सरकारी हिन्दी प्राइमरी स्कूल में पढ़े और अब उन बच्चों को अचानक अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश देना संभव नहीं है।
इन बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में प्रवेश दिया भी गया तो वह अन्य बच्चों के मुकाबले पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे। यही कारण है कि शहरी क्षेत्र को छोड़ कर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की सीटें अब खाली है। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में खाली सीटों को भरने स्कूल स्तर पर पालकों से ऑफलाइन आवेदन मंगाया जा रहा है।
बच्चों को प्रवेश देने मापदंड तैयार किए जिसके तहत बच्चे ने पहली एवं दूसरी कक्षा की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में की है तो ऐसे बच्चों को अगली कक्षा में प्रवेश दिया जा सकता है लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसे बच्चों की खोज करनी पड़ रही है।
गांव में अंग्रेजी माध्यम स्कूलों कम होते है अधिकतर बच्चे सरकारी प्राइमरी स्कूल में हिन्दी माध्यम में पढ़ते है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में अब 4 दिनों का समय शेष है। सत्र शुरू होने से पहले सभी सीटों पर बच्चों को एडमिशन देना चुनौती है।
ज्यादा आवेदन मिले तो लॉटरी से प्रवेश दी जाएगी
जिले के छुरिया, डोंगरगांव, डोंगरगढ़, एलबी नगर, भर्रेगांव, घुमका, सुकुल दैहान, ग्रामीण क्षेत्र में पहली कक्षा की 50 सीटों पर प्रवेश दिया जाना था। लेकिन काफी कम आवेदन पहुंचे। एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि निकल चुकी है लेकिन सीटें खाली रहने के कारण ऑफलाइन आवेदन मंगाया जा रहा है। सीटों के मुकाबले ज्यादा आवेदन पहुंचे तो लॉटरी के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश स्वामी आत्मानंद स्कूलो की सीटों को भरने शिक्षा विभाग के अफसर विद्यार्थियों की खोज कर उन्हें प्रेरित करने में जुटे हैं।
ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में सुविधा नहीं, परेशानी
ग्रामीण इलाकों में स्वामी आत्मानंद स्कूल खोलने की मांग पर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के द्वारा वहां संचालित स्कूलों को स्वामी आत्मानंद स्कूलों में तब्दील कर दिया गया। लेकिन कहीं कमरों की कमी है तो कहीं पर्याप्त फर्निचर, लैब की सुविधा नहीं है। सुविधा नहीं होने के कारण पालक बच्चों को इन स्कूलों में प्रवेश दिलाने रुचि नहीं ले रहे हैं। सीटें खाली रहने का यह भी एक प्रमुख कारण है। चार दिन बाद नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाएगा इधर ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में अब भी भवनों की मरम्मत, बाउंड्रीवाॅल की मरम्मत सहित अन्य काम अधूरे हैं।
हिन्दी माध्यम में पालकों का रुझान कमोबेश कम
ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि तक शहरी क्षेत्र के स्वामी आत्मानंद स्कूल में तब्दील म्युनिस्पल स्कूल एवं बख्शी स्कूल में प्रवेश के लिए सीटों के मुकाबले कई गुना आवेदन पहुंचे थे उन्हें लॉटरी सिस्टम से प्रवेश दिया गया। हिन्दी माध्यम वाले स्वामी आत्मानंद में तब्दील स्टेट हाईस्कूल में जितनी सीटें उतने ही आवेदन पहुंचे थे। यहां नर्सरी की कक्षा नहीं है लेकिन ईग्नाइट योजना के तहत 6वीं से 8वीं अंग्रेजी माध्यम संचालित है। यहां से उत्तीर्ण बच्चों के सामने आगे की पढ़ाई करने विकल्प नहीं उन बच्चों को स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में प्रवेश देंगे।