पीएम जन औषधि केंद्र से बिक रही है ब्रांडेड दवाएं, मरीजों को देनी पड़ रही दोगुनी कीमत

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जिला अस्पताल के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से सस्ती जेनरिक दवाओं की जगह महंगी ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही हैं। 6.82 रुपए में मिल पाने वाली दवा को मरीज 20.50 रुपए में खरीद रहा है। यह उदाहरण केवल एक गैस की दवा का है, जिसे हर मरीज को दिया ही जाता है। इस बड़ी गड़बड़ी का खुलासा शनिवार को भास्कर स्टिंग में हुआ है। सस्ती दवाएं रहते हुए मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाएं देते कर्मचारी कैमरे में कैद हुए हैं।

इस काम को बाकायदा अधिकारियों से साठगांठ कर अंजाम दिया जा रहा है। दुकान संचालक का कहना है कि जन औषधि केंद्र से ब्रांडेड व खुले बाजार की जेनरिक दवाएं बेचने उसने अनुमति ली है। जबकि सिविल सर्जन व सीएमएचओ ने बताया कि उन्होंने ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है। जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 800 मरीज आते हैं। करीब 50% यानी कि 400 मरीजों को अन्य दवाओं के साथ गैस की दवा की जरूरत होती है। इस मनमानी से केंद्र संचालक को एक दवा के एवज में रोज 5200 रुपए का फायदा और मरीजों को उतने का ही नुकसान हो रहा है। इसी तरह दो दर्जन से ज्यादा प्रकार की एथिकल, ब्रांडेड महंगी दवाएं रोज जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को खुलेआम बेची जा रही है। इतना ही नहीं कई प्रकार के सर्जिकल प्रोडक्ट भी बाजार मूल्य से दोगुनी कीमत पर बेच रहे हैं।

महंगी दवा देते कैमरे में कर्मी हुआ कैद, बताया- सारे ब्रांड उपलब्ध
शनिवार की सुबह मरीजों ने भास्कर संवाददाता को जिला अस्पताल के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से सस्ती जनरिक की जगह महंगी ब्रांडेड दवाएं बेचने की सूचना दी। इस पर संवाददाता खुद बीपी-शुगर मरीज बनकर वहां पहुंच गए। दोनों बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मांगा तो कर्मचारी ने ब्रांडेड दवाएं निकालकर पकड़ा दिया।

2 केस से समझिए, जनऔषधि केंद्र में ऐसे चल रहा खेल

केस-1 : जेनरिक की जगह तीन गुना में ब्रांडेड दवा दी
35 वर्षीय सरिता ने बताया कि शनिवार को जिला अस्पताल की डॉक्टर ने उसे 30 दिन के लिए 3 दवाएं लिखी। अस्पताल के दवा कक्ष से दो दवाएं मिल गई, तीसरे के लिए पीएम जन औषधि केंद्र भेजा गया। यहां ओमेकोप ब्रांड नेम की दवा 20 रु. में 10 गोली दी गई। जबकि पड़ताल में उसी केंद्र में यह दवा 6.80 रुपए में उपलब्ध मिली।

केस-2 : 150 की दवा के रहते 370 रुपए वाली थमाई
25 वर्षीय रानी ने बताया कि पाइल्स की वजह शनिवार को वह जिला अस्पताल गई। परेशानी पूछने के बाद डॉक्टर ने दो दवाएं, एक क्रीम व दूसरा सीरप बाहर से लेने को कहा। मुख्य द्वार के जनऔषधि केंद्र से दोनों दवाओं को 370 रु. में खरीदा। जबकि यही दवाई उस केंद्र में 150 से भी कम कीमत की उपलब्ध थी। फिर भी नहीं दी।

केंद्र का ऐसा नियम, दूसरी जेनरिक दवा भी नहीं बेच सकते
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के स्टेट डिप्टी मैनेजर अनीश वेडितेलवार ने कहा कि उनके केंद्र से ब्रांडेड छोड़िए, कोई दूसरी जेनरिक दवाएं भी नहीं बेच सकता है। हर केंद्र पर दवा की आपूर्ति के लिए केंद्र सरकार ने राज्य स्तर पर स्टोर बनाया है। उनके यहां की हर दवा पर प्रधानमंत्री जन औषधि की मुहर लगी रहती है। उनकी जेनरिक दवाओं की एमआरपी पहले से फिक्स कर दी गई है। जबकि खुले बाजार में बिकने वाली जेनरिक दवाओं की एमआरपी तय नहीं होती है। अगर उनके किसी औषधि केंद्र से कोई दूसरी दवाओं के बिक्री की शिकायत मिलती है तो वह संबंधित केंद्र पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय अधिकारियों को लिखते हैं।

अधिकारियों की अनुमति से ही ब्रांडेड दवा बेच रहा हूं
जिला अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र मेरा ही है। अधिकारियों से अनुमति लेने के बाद ही ब्रांडेड दवाएं बेच रहा हूं। ऐसा करने के लिए मुझे मौखिक अनुमति मिली हुई है। पीएम जनरिक के साथ ही एथिकल और ब्रांडेड जनरिक भी रखा हूं। ... जैसा कि खुद को दुकान मालिक कहने वाले व्यक्ति ने बताया।

मैने अनुमति नहीं दी, ड्रग विभाग को चेक करना चाहिए
जिला अस्पताल परिसर में ही प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित है। मेरी जानकारी में वहां से पीएम औषधि की जनरिक दवाएं ही बेची जा रही है। मैने उन्हें ब्रांडेड, एथिकल या कोई दूसरी जनरिक बेचने की अनुमति नहीं दी है। ड्रग विभाग को चेक करना चाहिए।
-डॉ. पी बालकिशोर, सिविल सर्जन, दुर्ग।

ये गलत है लेकिन खरीदने वालों को भी देखना चाहिए
जिला अस्पताल के प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से उन्हें की डिपो की जनरिक दवा बेची जा सकती है। उसके अलावा कोई दूसरी दवा वहां से बेचना, नियम विरुद्ध है। लेकिन इसमें दवा लेने वालों की भी गलती है। उन्हें दवा लेने से पहले देखना चहिए।
-डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर, सीएमएचओ, दुर्ग।