राजकमल नायक लगभग 50 बरस से निरंतर रंगमंच के कार्य में संलिप्त है.....जाने राजकमल नायक की उपलब्धियों के बारे में

त्वरित ख़बरें - अभिजीत दुबे रिपोर्टिंग

समकालीन रंगमंच के विशिष्ट अभिकल्पक और मौलिक संकल्पनाओं के लिये प्रख्यात नाट्य निर्देशक, लेखक, अभिनेता लगभग 50 बरस से निरंतर रंगमंच में संलिप्त हैं। राजकमल नायक को प्रदर्शनकारी कलाओं का प्रतिष्ठित सम्मान संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार (2016) रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिये माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद द्वारा जनवरी 2017 में प्रदान किया गया तथा छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित चक्रधर सम्मान 2016 में  प्रदत्त किया गया। 

राजकमल नायक ने रंग पद्धतियों की प्रचलित परिपाटी से अलग हटकर कविता रंगमंच के लिए नई रंग ज़मीन तलाशने, नई शैली रचने का विलक्षण कार्य किया है। आधुनिक भारतीय कविता के साथ ही विश्व कविता को वे अपने रंग-उपक्रम के जरिए 'कविता का रंग-व्यवहार' नाम से अनेकों वर्षों से निरंतर प्रस्तुत कर रहे हैं ।

हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के 26 प्रतिष्ठित कवियों तथा 10 विश्व कवियों की लगभग 160 कविताओं की विचारोत्तेजक, रंजक नवाचारी प्रस्तुतियां राजकमल नायक ने की हैं।

राजकमल नायक ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय शीर्षस्थ नाट्य निर्देशकों के साथ अभिनय व नेपथ्यकर्म किया है जिनमें हबीब तनवीर, ब.व. कारंत, कावालम नारायण पणिक्कर, बंसी कौल,  फ्रिट्ज़ बेनेविट्ज़, जॉन-मार्टिन आदि प्रमुख हैं।

राजकमल नायक ने अनेक प्रदेशों में 60 नाट्य शिविरों का संचालन, निर्देशन किया है तथा 70 से अधिक नाटक विगत 50  वर्षों में निर्देशित किए हैं। इसके अलावा उनके 8 लघु नाटक प्रकाशित हुए हैं।

प्रख्यात फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल की फिल्म "समर" तथा ब.व. कारंत निर्देशित टेली फिल्म "औरत भली रामकली" में राजकमल नायक ने प्रमुख भूमिकाएं अभिनीत की हैं। उन्होंने आकाशवाणी व दूरदर्शन के लिए लेखन किया है।

राजकमल नायक संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की रंगमंच के लिए सीनियर फैलोशिप (2005-2007) प्राप्त छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ रंगकर्मी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली, संगीत नाटक अकादेमी नई दिल्ली, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादेमी मसूरी, मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल, म.प्र. कला परिषद भोपाल, दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर, राष्ट्रीय साक्षरता मिशन प्राधिकरण नई दिल्ली, बचपन बचाओ आंदोलन नई दिल्ली, भिलाई इस्पात संयंत्र, एन.टी.पी.सी कोरबा आदि महत्वपूर्ण संस्थानों  के सौजन्य से नाट्य शिविरों व नाट्य प्रस्तुतियों का निर्देशन किया है।

राजकमल नायक ने वर्ष 1990 से अब तक, साक्षरता, जल संग्रहण, जल प्रदूषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पॉलीथिन आदि विषयों पर नाट्य लेखन तो किया ही है, साथ ही राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय, क्षेत्रीय अनेकों नाट्य शिविरों का निर्देशन एवं हज़ारों नाट्य प्रदर्शन किए हैं।

वे बहुचर्चित नाट्य पत्रिका रंग संवाद, सिलसिला तथा नई इबारत पत्रिका के संपादक रहे हैं । राजकमल नायक के रंग आलेख, रपट, नाट्य समीक्षा, कविताएं समय-समय पर देश की प्रमुख पत्रिकाओं तथा अखबारों में प्रकाशित होती रही हैं

रंगमंच में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें अनेकों सम्मान व पुरस्कार समय-समय पर प्राप्त हुए हैं।

सम्मान / पुरस्कार

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रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए प्रदर्शनकारी कलाओं का प्रतिष्ठित सम्मान-

• संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार (2016)

• छत्तीसगढ़ शासन के कला एवं संगीत के लिए स्थापित प्रतिष्ठित राज्य अलंकरण 'चक्रधर सम्मान' 2016 से सम्मानित। 

• संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की सीनियर फैलोशिप वर्ष 2005-07 (रंगमंच के लिए)

• अमीचंद डालमिया सृजन सम्मान 2001, माता सुंदरी फाउंडेशन अवार्ड 2004, छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग द्वारा 2004 में सम्मानित।

• रायपुर सिटी जेसीज़ द्वारा वर्ष 1983 में तथा रोटरी क्लब रायपुर द्वारा 1984-85 में युवा प्रतिभा सम्मान।

• डी.एम.सी अखिल भारतीय नाट्य प्रतियोगिता में वर्ष 1981 में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक तथा सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति का पुरस्कार ।