भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव भजन में पूरा गांव झूमा राजनांदगांव।

त्वरित खबरे :

23 फरवरी 2023

राजनांदगांव। ग्राम मुड़पार (सुरगी) में कृपासिंधु भगवान श्री कृष्ण चंद्र जी की असीम कृपा, कुल देवी देवता एवं स्वर्गीय श्री हेमराय साहू की पुण्य स्मृति में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन 18 फरवरी से 26 फरवरी तक किया जा रहा है। इसके कथा वाचक भागवताचार्य पंडित होमेंद्र प्रसाद दुबे जी (ग्राम सुरगी) राजनांदगांव है। मुख्य यजमान श्रीमती देवगन बाई साहू, पार्वती नरेंद्र साहू ,रामा धार रिखमा बाई, परमेश्वर सोनी बाई साहू ,सुखचंद साहू, वामिनी (ईश्वरी) हेमंत कुमार ,शिवाजी (तोमन) श्रीमती तनु साहू है।

कथा वाचक भागवताचार्य पंडित होमेंद्र प्रसाद दुबे ने अपनी कथा प्रसंग मे कहा कि राजा दशरथ के विजय श्री और स्वयं की रक्षा के लिए केकई ने अपनी उंगली रथ के पहिए जिसका खिला निकल जाने से केकई ने उस में उंगली डालकर राजा दशरथ ने रथ् चलाई ,राजा दशरथ रणभूमि में विजई हुए इसी की वजह से केकई ने अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी मांगी और भगवान श्री राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांगा उन्होंने कथा प्रसंग में आगे कहा कि माता यशोदा क और नंद बाबा के यहा पूर्वजन्म में घर में अन्न का एक भी दाना नहीं था ऐसे समय में माता यशोदा ने अपने स्तन को काटकर बेचकर भगवान को भोजन कराएं जिससे भगवान प्रसन्न होकर उनके घर में जन्म लिया। पंडित होमेद्र दुबे जी ने आगे कहा कि जिस जगह में भगवान शंकर का चरण ना हो तो यज्ञ सफल नहीं होता कर्म का फल अवश्य मिलता है ,इसलिए अच्छे कर्म करें ,भगवान को हमेशा अच्छी चीज अर्पित करें। परमात्मा घट घट में बसे हैं, भगवान के चरणों में कुछ समय जरूर देना चाहिए जिससे हमें शांति मिलेगी। लंका में राम जी 111 दिन रहे, माता सीता जी 435 दिन रहे और रामायण में 6608 चौपाई है और 86 छंद है 207 दोहा है सुग्रीव का बल 1000 हाथी के बल है भगवान 400 मील रफ्तार से अयोध्या वापस आए।  दुबे जी ने कथा प्रसंग मे कहा कि पार्थिव शिवलिंग मिट्टी, रेती का पूर्णिमा के दिन बनाकर पूजा करने से पूर्णिमा का तेजस्वी का दिन माना गया है हमारे जीवन में उसका तेजस्वी प्रभाव पड़ता है। भगवान रामेश्वर का निर्माण 5 दिन में सेतु निर्माण हो गया। भक्त बनने के लिए आपको भक्ति धारण करना पड़ेगा । मीठा वचन ही घर को सुंदर बनाती है। अपने घर के मुख्य दरवाजे में पंचमुखी हनुमान जी की फोटो अवश्य रखें।

कृष्ण जन्म उत्सव की कथा सुनाई और जन्मोत्सव भजन पर पूरा गांव झूमा

 वासुदेव और देवकी के विवाह के बाद कंस दोनों को छोड़ने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई की देवकी का आठवां पुत्र तुम्हारा काल होगा। आकाशवाणी होने से कंस भय में जीने लगा और वह वासुदेव देवकी को वापिस अपने नगर में लाकर कठिन कारावास में भेज दिया। समय बीतने लगा पहला जन्म कन्या का हुआ इस तरह सातवा जन्म रोहनी के गर्भ में गया और 8 वा जन्म भगवान श्री कृष्ण के रूप में देवकी के गर्भ में आया।