सत्य और ईमान को पकड कर रखना ही भागवत कथा का मूल मंत्र है : पंडित होमेंद्र दुबे

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राजनांदगांव।ग्राम बेलटिकरी(सुरगी) मे 20दिसंबर से 28दिसम्बर तक  मद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह स्वर्गीय हेमशंकर निषाद की वार्षिक श्राद्ध एवं स्मृति मे आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास भगवताचार्य पंडित होमेंद्र दुबे जी ग्राम सुरगी राजनांदगांव वाले है।परायण कर्ता पंडित वेद प्रकाश दुबे, मुख्य यजमान नंद राम निषाद,निर्मला निषाद,तेजराम निषाद,लक्ष्मी निषाद है।

भागवताचार्य पंडित होमेंद्र दुबे जी ने व्यासपीठ से कथा प्रसंग मे कहा कि  माघी पुन्नी के दिन भगवान श्री कृष्ण और शंकर एक साथ प्रगट हुए थे बाणासुर ने  भगवान शंकर और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना की गई।इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने सोलह हजार कन्याओ के साथ विवाह किया था। इसलिए यह दिन बहुत ही सौभाग्य माना गया है ।

पंडित दुबे जी ने आगे कहा कि अपने जीवन में कभी भी कंलग ना लगने देना।सत्य और ईमान को पकड़ कर रखना ही भागवत कथा का मूल मंत्र है।मन के मैल को हरि कथा से धो सकते है।

0 सुदामा चरित्र  का मार्मिक कथा

सुदामा चरित्र में कहा कि मैंने आज अपने जीवन में 33 सालों तक लगातार पूजा अर्चना  किया।यही ग्राम से भागवत कथा प्रसंग शुरू किया।उन्होंने सुदामा चरित्र में कहा कि घर में  एक दाना अन्न नहीं था। गरीबी चरम पर था। उन्होंने आगे कहा कि भगवान की भक्ति करते रहे। भगवान श्री कृष्ण ने दो मुठी चांवल खाकर सुदामा को दो लोक का स्वामी बना  दिया था। उक्त जानकारी रुपेंद्र साहू ने दी ।