राजनांदगांव। स्कूल जाने वाले बच्चों में बचपन संबंधी विकार : मूल्यांकन और हस्तक्षेप विषय पर कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) राजनांदगांव में दो दिवसीय कंटीन्यूइंग रिहैबिलिटेशन एजुकेशन (सीआरई) कार्यक्रम का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों से 200 रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल शामिल हुए। इस दौरान विकार के लक्षण, कारण तथा इससे बचाव के विषय में विस्तृत चर्चा की गई।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगता सशक्तिकरण संस्थान के अधीन संचालित समेकित क्षेत्रीय केंद्र राजनांदगांव के द्वारा सीआरसी में यह दो दिवसीय कार्यक्रम भारतीय पुनर्वास परिषद, नई दिल्ली के नियमानुसार आयोजित किया गया। सीआरई वेबीनार का शुभारंभ निदेशक कुमार राजू ने किया। इस अवसर पर समेकित क्षेत्रीय केंद्र राजनांदगांव एवं पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी, रायपुर के विभिन्न रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल के द्वारा स्कूल जाने वाले बच्चों में बचपन संबंधी विकारः मूल्यांकन और हस्तक्षेप के विषय जैसे- बचपन संबंधी विकार क्या है, इसके होने के कारण एवं लक्षण, बौद्धिक अक्षमता, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, चिंता विकार, निराशाजनक बीमारी क्या हैं, बच्चों को देखकर इसकी कैसे पहचान कर सकते हैं तथा इस प्रकार के बच्चों का विभिन्न प्रकार के चिकित्सकीय एवं हस्तक्षेप कर रोकथाम करने के विषय में सारगर्भित चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहाः बचपन संबंधी विकार की पहचान बच्चों द्वारा घर और स्कूल में किए जाने वाले व्यवहार को देखकर भी की जा सकती है। वहीं विकार का पता लगने की स्थिति में पीड़ित बच्चे का उपचार कराकर इस विकृति की रोकथाम की जा सकती है। बचपन संबंधी विकार के कारण होने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याएं और व्यावहारिक परिवर्तन का निदान सायकोलॉजिस्ट, विशेष शिक्षक एवं पालकों की टीम बनाकर कार्य करने से भी किया जा सकता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से मुक्त होने के अन्य प्रभावशाली उपायों की जानकारी दी गई।
वेबीनार में सीआरसी राजनांदगांव के मनोवैज्ञानिक विभाग की सहायक प्राध्यापक श्रीदेवी गोडिशाला ने सीखने की दिव्यांगता से पीड़ितों की सहायता के लिए केंद्र और राज्य शासन द्वारा दी जाने वाली विभिन्न प्रकार की योजनाओं (एडीआईपी /एसआईपीडीए) तथा किरण यानी भारत सरकार के 24ग7 टोल फ्री मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास नंबर. 1800-599-0019 की जानकारी दी। उन्होंने कहाः इस वेबीनार में दी गई जानकारी से प्रतिभागी को अपने क्षेत्र में दिव्यांगजन का जीवन स्तर ऊंचा उठाने में सहायता मिलेगी। सीआरई वेबीनार के सभी सत्र के बाद भारतीय पुनर्वास परिषद, नई दिल्ली के नियमानुसार प्रतिभागियों का मूल्यांकन कर सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया गया, ताकि प्रतिभागियों का आत्मबल बढ़ाया जा सके।
इस वेबीनार को सहायक प्राध्यापक (मनोविज्ञानिक विभाग) श्रीदेवी गोडिशाला, सहायक प्राध्यापक राजेंद्र कुमार प्रवीण, विशेष प्रशिक्षक प्रसादी कुमार महतो, विशेष शिक्षा विभाग के निधि राजन तथा समेकित क्षेत्रीय केंद्र राजनांदगांव एवं पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटीए रायपुर के कई रिहैबिलिटेशन प्रोफेशनल ने भी संबोधित किया और सीखने की दिव्यांगता से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की।