13 जुलाई 2022
सुपर मून से पृथ्वी पर पड़ेगा ये प्रभाव
बता दें कि बुधवार को पूर्णिमा भी है. इससे पहले 14 जून को वट पूर्णिमा के मौके पर चांद अपनी कक्षा में धरती के बेहद करीब था. जिससे इसका आकार सामान्य से काफी बड़ा देखने को मिला था. सुपरमून का पृथ्वी पर ज्वारीय प्रभाव हो सकता है. जिसके चलते उच्च और निम्न महासागरीय ज्वार की एक बड़ी श्रृंखला उत्पन्न होने की संभावना जताई जा रही है. खगोलविदों को उम्मीद है कि इस समय के आसपास समुद्र में तटीय इलाकों में हाई टाइड के चलते बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है. धरती से चांद की दूरी उस वक्त 3 लाख 57 हजार 2 सौ 64 किमी होगी. इस सुपर मून को शाम के समय आसमान में दक्षिण पूर्वी दिशा में देखा जा सकेगा.