गर्भपात पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर:अमेरिका: अबॉर्शन का अधिकार मिलने के बाद रोजगार में महिलाओं की संख्या 14% बढ़ी; गरीबी भी कम हुई

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16 मई 2022

बारबरा श्वार्ट्ज न्यूयॉर्क के ब्रॉडवे थिएटर में सहायक के बतौर अपने काम के दिनों को याद करते हुए कहती हैंं कि वे माहौल की जीवंतता को भूल नहीं पाती हैं। 1976 में गर्भपात का निर्णय लेने के बाद उन्होंने काम की शुरुआत की थी। इससे तीन साल पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित रो विरुद्ध वेड मामले में अबार्शन को संवैधानिक अधिकार घोषित किया था।


69 वर्ष की श्वार्ट्ज रिटायर हो चुकी हैं। रिटायरमेंट के बाद वे महिलाओं को अबॉर्शन क्लीनिक तक पहुंचाने में मदद करती हैं। कई कानूनों की वजह से अबार्शन में मुश्किलों के कारण श्वार्ट्ज ने यह काम हाथ में लिया है। अमेरिका में अब अबॉर्शन का अधिकार खतरे में पड़ने की संभावना नजर आ रही है। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के लीक हो चुके एक फैसले में रो-वेड मामले का निर्णय उलट दिए जाने का खुलासा हुआ है। यह निर्णय अगले माह आ सकता है। 67 वर्ष की जिनी जिलेटिस 2016 में इतिहास के प्रोफेसर की नौकरी से रिटायर हुई हैं। वे भी महिलाओं को गर्भपात क्लीनिक तक पहुंचाने के अभियान से जुड़ी हैं। काम और अवसरों के मामले में श्वार्ट्ज और जिलेटिस जैसी महिलाओं की दुनिया 1970 के दशक में तेजी से बदली है। गर्भपात का कानूनी हक मिलने के बाद लेबर फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 1970 के 43 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 57.4 प्रतिशत हो गई। इन सालों में कई अन्य कारणों से नौकरियों और अन्य कामों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अबॉर्शन का अधिकार सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारण है।

श्वार्ट्ज सहित कई महिलाएं मानती हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 1973 के फैसले की वजह से उनका करिअर बन पाया है। इसलिए वे अन्य महिलाओं को अबॉर्शन क्लीनिक तक पहुंचाने के मिशन में लगी हैं। जो बुजुर्ग महिलाएं मानती है कि अबॉर्शन का अधिकार मिलने के बाद उन्हें आर्थिक स्थिरता मिली है, वे क्लीनिक में आने वाली युवतियों को अपने अनुभव बताती हैं। बीते पचास वर्षों में नई टेक्नोलॉजी, शिक्षा सहित सामाजिक कारणों से वर्क फोर्स में महिलाओं का प्रवेश हुआ है। लेकिन, समाजशास्त्रियों और अर्थशास्त्रियों की सोच है कि गर्भपात को कानूनी दर्जा हासिल होना सबसे बड़ा कारण है। नई रिसर्च ने महिलाओं के रोजगार में गर्भपात की भूमिका को समझने की कोशिश की है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने महिलाओं के दो ग्रुप की पांच वर्ष तक स्टडी की। एक ग्रुप अबॉर्शन चाहता था और उसने कराया भी।

दूसरा ग्रुप चाहने के बावजूद अबॉर्शन नहीं करा सका। अबॉर्शन ना कराने वाली 55 प्रतिशत महिलाओं की आर्थिक स्थिति उन 45 प्रतिशत महिलाओं से कमजोर पाई गई जिन्होंने अबॉर्शन कराया था। अबॉर्शन ना कराने वाली महिलाओं की गरीबी छह माह बाद बढ़ गई।

अगर रो-वेड मामले का फैसला उलट दिया जाता है तो अमेरिका में महिलाओं को राज्यों के कानूनों से जूझना पड़ेगा। फैसले के बाद 13 राज्य गर्भपात पर फौरन या जल्द प्रतिबंध लगा सकते हैं।

59 प्रतिशत अमेरिकी अबॉर्शन
को वैध मानने के पक्ष में

2021 में प्यू रिसर्च के सर्वे में 59 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा कि सभी या अधिकतर मामलों में अबॉर्शन वैध होना चाहिए। 39 प्रतिशत मानते हैं कि सभी या अधिकतर मामलों में गर्भपात अवैध होना चाहिए।

नए सर्वे से संकेत मिले हैं कि सभी मामलों में गर्भपात को कानूनी मानने वालों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या थोड़ी ज्यादा है। अधिक आयु के लोगों की तुलना में 18 से 29 वर्ष की आयु के युवा मानते हैं कि गर्भपात वैध होना चाहिए।