रायपुर 7 अप्रैल कोरोना की तीसरी लहर से मुकाबले के लिए खरीदे गए 4 करोड़ के वेंटिलेटर, 13 करोड़ के ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और करीब 4 करोड़ के सिलेंडर डंप हो गए हैं। सैकड़ों सिलेंडर और कंसंट्रेटर तो ऐसे हैं कि पैकिंग तक खोलने की जरूरत नहीं पड़ी। तीसरी लहर के पहले जिस स्थिति में उन्हें लाया गया था, पूरे उपकरण उसी स्थिति में पड़े हैं।
कई जगह सिलेंडर रखने की जगह नहीं है, तो खुले में रख दिया गया है, जिससे इनमें जंग लगने लगा है। इससे स्वास्थ्य विभाग अब इन्हें बचाने की चिंता में जुट गया है। इन्हें चालू हालत में कैसे रखा जाए, इसकी गाइडलाइन जारी की गई है। दूसरी लहर में जिस तरह की स्थिति पैदा हुई थी, उसे ध्यान में रखते हुए तीसरी लहर के पहले ही करोड़ों के उपकरण और मशीनें खरीदी के आर्डर दे दिए गए।
इसके अलावा कुछ उपकरण केंद्र सरकार से तो कई मशीनें समाज सेवी संस्थाओं की ओर से स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई गई। कोरोना की तीसरी लहर की एंट्री भी बेहद चौंकाने वाली हुई थी, लेकिन राहत की बात रही कि तीसरी लहर में लोग संक्रमित तो हुए लेकिन 90 फीसदी से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत ही नहीं आई। यही वजह है कि करोड़ों के उपकरणों और मशीनों के उपयोग की जरूरत ही नहीं पड़ी। अब उन्हीं उपकरणों को सुरक्षित रखना स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
राजधानी रायपुर में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के एक हिस्से में ऑक्सीजन सिलेंडरों का ढेर लगा है। कोराेना की तीसरी लहर के दौरान खरीदे गए सिलेंडरों की जरूरत नहीं पड़ी। पड़े-पड़े उनकी पैकिंग फट गई। कुछ सिलेंडरों में जंग लगने लगा है।
खरीदी हुई थी
- 1118 मल्टी पैरा मॉनीटर
- 19741डी टाइप सिलेंडर
- 9365ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
- 9671बी टाइप सिलेंडर
- 1112 वेंटिलेटर(मिक्स)
पड़े हैं डंप
- 2714 ऑक्सीजन सिलेंडर
- 2785ऑक्सीजन कसंट्रेटर
- 80 वेंटिलेटर(मिक्स)
- 02 एबीजी मशीन
- 80 मल्टी पैरा मॉनीटर