नारायणपुर 1 अप्रैल। जीवन एक घड़ी की सुई की तरह है, जहां उतार- चढ़ाव बना ही रहता है। ऐसे में कई बार जीवन निराशापूर्ण लगने लगता है और उम्मीद की किरण मिटती हुई दिखाई देती है। प्रायः हर व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है जब वह जीवन के प्रति उदासीन हो जाता हैं। यह महसूस करना सामान्य है, लेकिन सिर्फ तब तक जब तक यह विचार आत्मघाती न हो जाएं। इसलिए लोगो मे तनाव प्रबन्धन एवं आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूकता ज़रूरी हो जाती है। इसी उद्देश्य के तहत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के टैक्टिकल हेडक्वार्टर नारायणपुर में 45वें बटालियन के जवानों हेतु "तनाव प्रबंधन एवं आत्महत्या रोकथाम" पर एक- कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस एक-दिवसीय कार्यक्रम के विषय में मनोचिकित्सक प्रीति चांडक ने बताया, "राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत नारायणपुर में आईटीबीपी के जवानों को मानसिक स्वास्थ्य काउंसलिंग कर, तनाव से बचने के आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी देने के लिए इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य व उस से जुड़ी समस्याओं के लक्षण एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी। साथ ही जवानों को विभिन्न एक्टिविटी के माध्यम से तनाव को कम करने के उपाय के बारे में भी बताया गया।"
उन्होंने बताया, "अक्सर लोग अपनी मानसिक बीमारियों को छिपाते हैं और खुलकर उस पर बात नहीं करना चाहते हैं। तनाव की स्थिति जब बढ़ने लगती है तो शरीर मे दमा, हाइपरटेंशन, स्मृतिलोप, दुर्बलता, सिरदर्द, हृदयरोग जैसी समस्यायें उत्पन्न होने लगती है। अत: किसी भी परिस्थिति में अकेले न रहें। यदि किसी को कुछ समस्या है तो अपने परिवार वालों या करीबियों से बात करे, उन्हें अपनी समस्या बताएं और समस्या का समाधान खोजें। इसके अतिरिक्त अपने दैनिक गतिविधियों में से कुछ समय निकालकर खुद के लिये समय दें, योगाभ्यास करें, खानपान में सुधार करें और पर्याप्त नींद लें। मन मे आत्महत्या जैसे नकारात्मक विचार आने पर पहला कदम होना चाहिए मदद मांगना। मानसिक अस्वस्थता की स्थिति हो तो घबराएं नही, जिला अस्पताल में स्पर्श क्लीनिक के माध्यम से मानसिक रोगियों को निःशुल्क परामर्श व उपचार दिया जाता है। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नम्बर 104 पर डायल कर मनोवैज्ञानिक सलाह लिया जा सकता है।"
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन डॉ. बी. आर. पुजारी (सीएमएचओ) एवं डॉ एम के सूर्यवंशी (सिविल सर्जन) के आदेशानुसार, प्रभारी डीपीएम डॉ परमानंद बघेल के सहयोग,नोडल अधिकारी डॉक्टर प्रशांत गिरी के निर्देशन में,भानु प्रताप सिंह (आईटीबीपी कमांडेंट ऑफिसर), मारकंडेय (डिप्टी कमांडेंट), डॉ. हाराथी ( स्वास्थ्य अधिकारी), मनोचिकित्सक प्रीति चांडक की उपस्थिति में किया गया।