जगदलपुर 23 मार्च। विश्व टीबी या तपेदिक दिवस हर साल 24 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य टीबी को लेकर लोगों को जागरूक करने के साथ ही इसकी रोकथाम करने से है। इस साल ‘विश्व टीबी दिवस 2022’ की थीम "Invest to End TB. Save Lives'' जिसका अर्थ "टीबी को खत्म करने के लिए निवेश करें, जीवन बचाए" है। टीबी की रोकथाम व उसके प्रति जन जागरण के लिये बस्तर जिले में स्वास्थ्य विभाग व युवोदय के वालंटियर द्वारा रैली निकाली जाएगी। इस दौरान प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
इस सम्बन्ध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के.चतुर्वेदी ने बताया,"टीबी दिवस पर जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे जिसमें रैली, वाल पेंटिंग आदि कार्यक्रम होंगे। टीबी दिवस पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य, लोगों को जागरूक करना है ताकि देश में टीबी के उन्मूलन का मार्ग प्रशस्त हो सके। एसे में विभाग का पूरा प्रयास है कि एक भी टीबी मरीज उपचार से वंचित नहीं रहने पाए। इसके लिए लगातार विभाग की तरफ से समय-समय पर एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा है। टीबी संक्रमण की शुरुआत में ही मरीज की पहचान होने से उसका उपचार आसान हो जाता है और उसके परिवार के अन्य सदस्यों को संक्रमण की चपेट में आने का खतरा कम रहता है। टीबी एक संक्रामक रोग है। जो बीमार व्यक्ति से सेहतमंद लोगों में फैल सकता है। टीबी की बीमारी का इलाज उपलब्ध है। लेकिन जागरूकता के अभाव में आज भी इससे लोगों की जान जा रही है। नियमित उपचार के बाद क्षय रोग पूरी तरह ठीक हो जाता है।" उन्होंने आगे बताया, “वैश्विक जगत में 2030 तक टीबी उन्मूलन करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि भारत का लक्ष्य 2025 तक टीबी मुक्त होना है। वहीँ छत्तीसगढ़ राज्य ने इसके लिए वर्ष 2023 निर्धारित किया है ताकि जल्द से जल्द टीबी की बीमारी को मिटाया जा सके।”
वहीं क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ.सी.आर.मैत्री ने बताया, "टीबी एक संक्रामक बीमारी है। जो बैक्टीरिया के कारण फैलता है। इसे तपेदिक या ट्यूबरक्लोसिस भी कहा जाता है। टीबी रोग से पीड़ित व्यक्ति के खाँसने या छीकने से, टीबी के कीटाणु श्वसन के द्वारा स्वस्थ व्यक्ति के शरीर मे प्रवेश करके उसे संक्रमित करता है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे प्रमुख फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है" ।
क्षय रोग के जांच के तरीके
क्षय रोग की जांच करने के लिए कई माध्यम हैं, जैसे- छाती का एक्स रे, बलगम की जांच, स्किन टेस्ट , सीबी नाट आदि। इसके अलावा आधुनिक तकनीक के माध्यम से आईजीएम हीमोग्लोबिन जांच कर भी टीबी का पता लगाया जा सकता है। समस्त जांच सरकार द्वारा निःशुल्क करवाई जाती हैं।
क्षय रोग से बचने के उपाय
• दो हफ्तों से अधिक समय तक खांसी रहती है, तो चिकित्सक को दिखायें।
• बीमार व्यक्ति से दूरी बनायें।
• आस-पास कोई बहुत देर तक खांस रहा है, तो उससे दूर रहें।
• अगर किसी बीमार व्यक्ति से मिलने जा रहे हैं या मिलकर आ रहे हैं तो अपने हाथों को जरूर धोलें।
• ऐसे पौष्टिक आहार लें जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन, खनिज लवण, कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर हों क्योंकि
पौष्टिक आहार हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं।
• अधिक समय से खांसी है, तो बलगम की जांच जरूर करा लें