बच्चों में घुटने, कमर या कूल्हे में बार-बार दर्द होना केवल बढ़ती उम्र का असर नहीं है। इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। चलने में परेशानी, रात में लगातार दर्द या मांसपेशियों में कमजोरी किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। विटामिन-D और कैल्शियम की कमी बच्चों की हड्डियों के विकास को प्रभावित कर सकती है।
सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध में भारत के 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों से जुड़े 23 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें 66.4 प्रतिशत बच्चों में विटामिन-D की कमी होने का अनुमान सामने आया। विटामिन-D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी गंभीर कमी से बच्चों में रिकेट्स की बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां कमजोर होकर मुड़ने लगती हैं।
पहले साल में विटामिन-D देना जरूरी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सागर स्वर्णकार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आरंग के मुताबिक, जन्म से एक साल तक के बच्चों को विटामिन-D की पर्याप्त मात्रा मिलना जरूरी है। मां के दूध में इसकी मात्रा आमतौर पर कम होती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट देने की जरूरत पड़ सकती है।
विटामिन-D की कमी से हड्डियों में कमजोरी, दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और दांत निकलने में देरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, भारी स्कूल बैग, शारीरिक गतिविधियों की कमी और असंतुलित खानपान भी बच्चों की सेहत पर असर डाल सकते हैं।
माता-पिता को बच्चों के बार-बार दर्द की शिकायत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि दर्द लगातार बना रहता है या चलने में परेशानी होती है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें। बच्चों को संतुलित आहार, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार विटामिन-D देना उनकी हड्डियों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।