जगदलपुर। मां दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ‘सहकार से समृद्धि’ वर्कशॉप का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां राष्ट्रीय सम्मेलन है। खास बात यह है कि बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक समृद्धि और विकास का लाभ पहुंचाना है।
पैक्स को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बनाने पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारिता की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे।
उन्होंने प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण धुरी बताते हुए देशभर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स के गठन, उनके पूर्ण डिजिटलीकरण और कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में विकास पर जोर दिया।
इसके साथ ही विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने तथा नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के विविधीकरण पर भी चर्चा हुई।
छत्तीसगढ़ में 500 से अधिक नई पैक्स का गठन
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्मेलन से जुड़े छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने राज्य में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि डेयरी, मत्स्य पालन और लघु वनोपज के क्षेत्रों में भी सहकारिता को बढ़ावा दिया जा रहा है। समितियों को डिजिटल सुविधाओं, माइक्रो-एटीएम और सीएससी सेवाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे ग्रामीण लोगों को सुविधाएं मिलने के साथ समितियों की आय भी बढ़ रही है।
बस्तर की सहकारिता संभावनाओं पर मंथन
छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर की जुझारू क्षमता का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ समय पहले क्षेत्र भारी जलभराव से प्रभावित हुआ था और सम्मेलन परिसर भी कई दिनों तक पानी में डूबा रहा। इसके बावजूद जिला प्रशासन और पूरी टीम ने चुनौती को अवसर में बदलते हुए कम समय में परिसर को राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार किया।
उन्होंने कहा कि बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और सहकारिता के क्षेत्र में मौजूद संभावनाएं स्थानीय आजीविका को नई दिशा दे सकती हैं।
देशभर के राज्यों ने साझा किए अनुभव
सम्मेलन में तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा सहित विभिन्न राज्यों के अधिकारियों ने सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सफल मॉडलों की जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के दौरान देश में सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। सम्मेलन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं द्वारा अपने उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए हैं।
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारी सहकारिता के सफल प्रयोग, नवाचार और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिव एवं पंजीयक तथा सहकारी संगठनों के प्रतिनिधि कार्यक्रम में मौजूद रहे।
राष्ट्रीय स्तर का यह मंथन सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।