दुर्ग, 18 सितंबर 2026। शासकीय वी.वाई.टी. पीजी स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के जूलॉजी विभाग की ओर से IQAC और IIC के बैनर तले तथा रूसा के प्रायोजन में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला ‘डेटा विश्लेषण और बौद्धिक संपदा अधिकार’ के दूसरे दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आधुनिक उपयोग और साइबर सुरक्षा पर विशेष विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र में ‘एआई एज’ विषय पर विशेषज्ञ संजय आशाटकर, मुख्य प्रबंधक, आईबीएस तेलंगाना ने शोध एवं डेटा विश्लेषण में AI की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने आधुनिक AI टूल्स के व्यावहारिक उपयोग और शोध कार्य में इनके इस्तेमाल से डेटा विश्लेषण को प्रभावी बनाने के तरीकों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
इसके बाद साइबर सुरक्षा पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। रेंज साइबर थाना दुर्ग के टाउन इंस्पेक्टर पुष्पेंद्र भट्ट और सहायक उप निरीक्षक डॉ. यशवंत श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए।
विशेषज्ञों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, OTP और बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया सुरक्षा, साइबर बुलिंग, फर्जी लिंक तथा व्यक्तिगत और डिजिटल डेटा की सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। साथ ही डिजिटल लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने और साइबर अपराध होने की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के महत्व पर भी जोर दिया।
कार्यशाला में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विभिन्न विभागों के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। सत्रों को संवादात्मक रखा गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। वास्तविक जीवन के उदाहरणों के जरिए AI के प्रभावी इस्तेमाल, साइबर जागरूकता, डिजिटल जिम्मेदारी और सुरक्षित तकनीकी व्यवहार की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का समन्वय शोधार्थी पूजा यादव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सहायक प्राध्यापक अनुराग मिश्रा और सुदेश साहू ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला के आयोजन में जूलॉजी विभाग की डॉ. नीरू अग्रवाल, डॉ. मौसमी डे और डॉ. अलका मिश्रा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जूलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डॉ. दिव्या के. मिंज तथा विभागीय टीम द्वारा कार्यशाला का संचालन किया जा रहा है।
कार्यशाला का तीसरा और अंतिम दिवस 19 सितंबर 2026 को आयोजित होगा, जिसमें ‘डेटा विश्लेषण’ विषय पर सत्र होगा। दूसरे दिन के विशेषज्ञ सत्रों ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकी उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।