सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना अनिवार्य, नहीं तो नौकरी और पदोन्नति पर असर

त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

रायपुर। कार्यरत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। यदि निर्धारित अवधि तक शिक्षक TET पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी नौकरी और पदोन्नति पर प्रभाव पड़ सकता है। इस फैसले के बाद देशभर के हजारों कार्यरत शिक्षकों में चर्चा तेज हो गई है।

31 अगस्त 2028 तक TET पास करना होगा अनिवार्य

छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी और प्रमुख महामंत्री सतीश ब्यौहरे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण करना होगा। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया है कि 31 अगस्त 2028 के बाद समय बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

हर साल दो बार TET परीक्षा कराने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकारों और संबंधित सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमित रूप से आयोजित की जाए। अदालत ने अधिमानतः हर वर्ष दो बार, लगभग छह-छह महीने के अंतराल पर TET परीक्षा कराने की बात कही है, ताकि सभी पात्र शिक्षकों को परीक्षा देने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

पदोन्नति पर भी पड़ेगा सीधा असर

फेडरेशन के अनुसार, न्यायालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों के पास TET की अर्हता नहीं होगी, उन्हें पदोन्नति के लिए विचारणीय नहीं माना जाएगा। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, वे सेवानिवृत्ति तक सेवा में बने रह सकते हैं, लेकिन पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा।

NCTE नियमों से जुड़ा है पूरा मामला

भारत में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का आयोजन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर CTET का आयोजन होता है, जबकि छत्तीसगढ़ में CG Vyapam के माध्यम से CG-TET आयोजित की जाती है। वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं था, जबकि बाद के वर्षों में भर्ती प्रक्रिया और नियमों में बदलाव के चलते यह पात्रता आवश्यक होती गई।

छत्तीसगढ़ सरकार से विभागीय TET कराने की मांग

शिक्षक फेडरेशन ने कहा है कि यदि राज्य सरकार समय पर TET परीक्षा आयोजित नहीं करेगी, तो कार्यरत शिक्षक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पात्रता कैसे प्राप्त करेंगे। इसलिए सरकार को अन्य राज्यों की तर्ज पर विभागीय TET आयोजित करनी चाहिए, ताकि किसी भी शिक्षक की सेवा या पदोन्नति केवल परीक्षा के अवसर न मिलने के कारण प्रभावित न हो।

शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा

फेडरेशन का कहना है कि वर्षों से विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे शिक्षकों के सम्मान, आजीविका और भविष्य को ध्यान में रखते हुए समय पर परीक्षा आयोजित करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में TET की अनिवार्यता को बरकरार रखते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद किसी प्रकार की अतिरिक्त मोहलत दिए जाने की संभावना नहीं है। ऐसे में अब राज्य सरकारों के सामने समय पर परीक्षा आयोजित करने और शिक्षकों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।