आरंग में 1.01 करोड़ की जमीन डील विवाद, नायब तहसीलदार और जनपद सदस्य पर धोखाधड़ी के आरोप...

त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

आरंग। रायपुर निवासी कुलदीप पाण्डेय ने आरंग क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर 1.01 करोड़ रुपये की जमीन डील में धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पत्रकार वार्ता में उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में भानसोज (आरंग) स्थित एक भूमि खरीदने के लिए राज आशीष मांडले (नायब तहसीलदार), अमर आशीष मांडले (जनपद सदस्य), त्रिविहार आशीष मांडले और अगरबाई मांडले के साथ विधिवत एग्रीमेंट किया गया था। उनका आरोप है कि पूरी रकम का भुगतान करने के बावजूद आज तक न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही उनकी राशि वापस लौटाई गई।

1.01 करोड़ रुपये भुगतान करने का दावा

कुलदीप पाण्डेय के अनुसार, उन्होंने जमीन सौदे के लिए कुल 1.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। इसमें 88 लाख रुपये बैंक ट्रांजैक्शन के माध्यम से और 13 लाख रुपये नकद दिए गए थे। उनका कहना है कि इस भुगतान का उल्लेख एग्रीमेंट में भी दर्ज है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक अनुबंध में राकेश कुमार बागरेचा और शशांग बागरेचा भी पक्षकार के रूप में शामिल थे।

रजिस्ट्री टालने और अतिरिक्त रकम मांगने का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि एग्रीमेंट के कुछ महीने बाद अमर आशीष मांडले ने सौदा आगे नहीं बढ़ाने की बात कही। जब उन्होंने अपनी राशि वापस मांगी तो भुगतान से इनकार कर दिया गया। इसके बाद कानूनी नोटिस भेजने पर विक्रेताओं ने सीमांकन के बाद रजिस्ट्री कराने की सहमति जताई, लेकिन सीमांकन और फसल का हवाला देकर लगभग एक वर्ष तक मामला टालते रहे। कुलदीप पाण्डेय का आरोप है कि अब उनसे 30 से 40 लाख रुपये अतिरिक्त देने की मांग की जा रही है और विरोध करने पर जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेचकर राशि लौटाने की बात कही जा रही है।

FIR दर्ज नहीं होने का भी लगाया आरोप

कुलदीप पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने करीब दो महीने पहले इस मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय, रायपुर और आरंग थाना में दी थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि प्रभावशाली पदों पर होने के कारण संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है।

जनपद सदस्य ने आरोपों का किया खंडन

वहीं, जनपद पंचायत सदस्य अमर आशीष मांडले ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि 30 अक्टूबर 2024 को हुए एग्रीमेंट के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री छह महीने के भीतर होनी थी, लेकिन खरीदार तय समय में रजिस्ट्री नहीं करा सके। उनके आग्रह पर तीन महीने का अतिरिक्त समय भी दिया गया। इसके बाद 30 जुलाई 2025 को नया एग्रीमेंट किया गया, जिसमें एक महीने की समय-सीमा तय की गई थी। मांडले का कहना है कि एग्रीमेंट में यह स्पष्ट उल्लेख है कि तय समय में रजिस्ट्री नहीं होने या सौदा रद्द होने की स्थिति में जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेची जा सकती है।

मामला जांच के दायरे में

फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप का है। एक पक्ष ने धोखाधड़ी और पुलिस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए एग्रीमेंट की शर्तों का हवाला दिया है। मामले में पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।