बलौदाबाजार। रक्षाबंधन पर्व से पहले छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार की स्कूली छात्राओं ने देश की सीमाओं पर तैनात सैनिकों के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त करने की अनूठी पहल की है। छात्राओं ने अपने हाथों से पर्यावरण मित्र (Eco-Friendly) राखियां तैयार की हैं, जिन्हें सैनिक भाइयों तक भेजा जाएगा। इन राखियों को धान, चावल, मौली धागा और ऊन जैसी प्राकृतिक सामग्री से बनाया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा सके।
धान, चावल और मौली धागे से तैयार हुई विशेष राखियां
छात्राओं ने बताया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं, बल्कि रक्षा, विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। जिस प्रकार एक भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी प्रकार भारतीय सेना के जवान पूरे देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। इसी भावना के साथ छात्राओं ने अपने हाथों से सैनिक भाइयों के लिए विशेष राखियां तैयार की हैं।
राखी के साथ भेजेंगी छत्तीसगढ़ की मिट्टी, रोली और शुभकामना पत्र
छात्राओं ने बताया कि सैनिकों को केवल राखी ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की पवित्र मिट्टी, रोली और अपने हाथों से लिखे शुभकामना पत्र भी भेजे जाएंगे। उनका मानना है कि प्रदेश की मिट्टी की खुशबू सैनिकों को अपने घर और मातृभूमि का एहसास कराएगी। वहीं रोली से वे विजय तिलक कर सकेंगे और शुभकामना पत्र उनके प्रति सम्मान और स्नेह का संदेश पहुंचाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण के साथ देशभक्ति का संदेश
राखियों के निर्माण में प्लास्टिक या कृत्रिम सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है। छात्राओं ने धान, चावल, मौली धागा और ऊन जैसी प्राकृतिक वस्तुओं से राखियां बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। उनका कहना है कि यह पहल रक्षाबंधन को प्रकृति और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने का प्रयास है।
'देश सुरक्षित है तो सैनिकों की वजह से'
छात्राओं ने कहा कि देश की सीमाओं पर तैनात सैनिक हर मौसम और हर परिस्थिति में देशवासियों की सुरक्षा के लिए डटे रहते हैं। आज पूरा देश सुरक्षित है तो इसका श्रेय हमारे वीर जवानों को जाता है। इसी भावना के साथ वे सैनिक भाइयों को राखी भेज रही हैं, ताकि उन्हें यह एहसास हो सके कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है और उनकी कुर्बानियों का सम्मान करता है।
प्राचार्य वंदना तिवारी ने बताई पहल की खासियत
विद्यालय की प्राचार्य वंदना तिवारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, सैनिकों के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सामग्री से तैयार की गई राखियां भारतीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती हैं। राखियों के साथ छत्तीसगढ़ की मिट्टी, रोली और शुभकामना संदेश भेजने से सैनिकों का अपने प्रदेश और मातृभूमि से भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होगा।
विद्यालय की इस पहल की स्थानीय स्तर पर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि इस तरह के प्रयास बच्चों में देशप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करते हैं।