BSP से 114 करोड़ का लोहा गायब! ऐसे चलता था हाईटेक चोरी का नेटवर्क, 14 पॉइंट में पूरी कहानी

त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में सामने आए करीब 114 करोड़ रुपये के लोहा चोरी कांड ने सभी को हैरान कर दिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि महीनों तक सुनियोजित तरीके से चलाया गया हाईटेक नेटवर्क था। इसमें अंदर और बाहर के लोगों की मिलीभगत से सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर लोहा संयंत्र से बाहर निकाला जाता था।

14 पॉइंट में समझिए पूरा नेटवर्क

1. लेबर आईडी से होती थी एंट्री
आरोपी असली या फर्जी लेबर आईडी का इस्तेमाल कर संयंत्र परिसर में आसानी से प्रवेश करते थे।

2. पहले से होती थी रेकी
किस शिफ्ट में सुरक्षा कम है, किस यार्ड में ज्यादा माल रखा है और किस रास्ते से ट्रक निकलेगा, इसकी पहले ही जानकारी जुटाई जाती थी।

3. ट्रकों में बनाए गए सीक्रेट चेंबर
ट्रकों के अंदर गुप्त खांचे (Secret Chamber) बनाए गए थे, जिनमें लोहा छिपाकर बाहर ले जाया जाता था।

4. वैध माल के नीचे छिपाया जाता था चोरी का सामान
ऊपर सामान्य सामग्री रहती थी, जबकि नीचे या गुप्त हिस्से में कीमती स्टील और लोहा रखा जाता था।

5. GPS बदलकर बचते थे आरोपी
वाहनों में लगे GPS डिवाइस बदल दिए जाते थे या कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाते थे ताकि ट्रैकिंग न हो सके।

6. नंबर प्लेट भी बदल दी जाती थी
एक ही ट्रक अलग-अलग नंबर प्लेट लगाकर कई बार संयंत्र के अंदर-बाहर आता-जाता था।

7. सुरक्षा जांच को दिया जाता था चकमा
सुरक्षा जांच के दौरान दस्तावेज और वाहन दोनों को इस तरह तैयार किया जाता था कि किसी को संदेह न हो।

8. तय समय पर निकलते थे ट्रक
ऐसे समय का चयन किया जाता था जब गेट पर भीड़ अधिक हो या जांच अपेक्षाकृत कम हो।

9. बाहर पहले से मौजूद था रिसीविंग नेटवर्क
संयंत्र से निकलते ही माल को दूसरे गोदामों और कबाड़ कारोबारियों तक पहुंचाया जाता था।

10. फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
परिवहन और माल से जुड़े दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर चोरी के माल को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।

11. करोड़ों रुपये का माल खपाया गया
जांच में सामने आया कि लंबे समय तक इसी तरीके से करोड़ों रुपये का लोहा बाहर भेजा गया।

12. कई लोगों की भूमिका जांच के घेरे में
मामले में ट्रांसपोर्टर, कबाड़ कारोबारी, कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

13. पुलिस और एजेंसियों की कार्रवाई जारी
जांच के दौरान कई स्थानों पर छापेमारी की गई है और दस्तावेजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

14. सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल
इतनी बड़ी चोरी के सामने आने के बाद BSP की सुरक्षा प्रणाली, निगरानी व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या है पूरा मामला?

प्रारंभिक जांच के अनुसार यह चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क द्वारा अंजाम दी गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था, चोरी का पूरा माल कहां-कहां पहुंचा और इस पूरे खेल से किसे कितना आर्थिक लाभ हुआ।

नोट: ₹114 करोड़ की चोरी, आरोपियों की भूमिका और जांच से जुड़ी जानकारी जांच एजेंसियों द्वारा सामने आए तथ्यों पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक एवं जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।