दुर्ग स्टेशन पर मानवता हुई शर्मसार, समय पर इलाज नहीं मिलने से गई जान

त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

दुर्ग ,रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को एक बेहद दर्दनाक और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई। इलाज के इंतजार में एक बुजुर्ग यात्री ने स्टेशन परिसर में ही दम तोड़ दिया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि जहां समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, वहीं शव वाहन पहले मौके पर पहुंच गया। इस घटना ने रेलवे स्टेशन की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली।जानकारी के अनुसार बुजुर्ग यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वे प्लेटफॉर्म पर काफी देर तक दर्द से तड़पते रहे और आसपास मौजूद लोग मदद के लिए इधर-उधर दौड़ते रहे। स्टेशन प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को सूचना भी दी गई, लेकिन काफी देर तक कोई मेडिकल सहायता नहीं पहुंची। लोगों ने एंबुलेंस बुलाने के लिए कई बार फोन किए, लेकिन मदद समय पर नहीं मिल सकी।घटना स्थल पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि बुजुर्ग की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। कुछ लोगों ने उन्हें पानी पिलाने और संभालने की कोशिश की, लेकिन बिना चिकित्सकीय सहायता के उनकी स्थिति गंभीर होती चली गई। इस दौरान स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए।सबसे दुखद पहलू यह रहा कि एंबुलेंस के पहुंचने से पहले शव वाहन स्टेशन पहुंच गया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों का कहना था कि यदि समय पर इलाज मिल जाता तो शायद बुजुर्ग की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की।स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्ग रेलवे स्टेशन जैसे बड़े और व्यस्त स्टेशन पर पर्याप्त मेडिकल सुविधा और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम होना बेहद जरूरी है। रोजाना हजारों यात्री यहां से सफर करते हैं, लेकिन आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। कई यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और बुजुर्ग की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। वहीं रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस पहुंचने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आम लोगों की जिंदगी की कीमत कब समझी जाएगी। समय पर इलाज और आपातकालीन सहायता किसी भी नागरिक का बुनियादी अधिकार है, लेकिन जब मदद का सिस्टम ही देर से पहुंचे तो ऐसे हादसे लोगों का भरोसा तोड़ देते हैं।