छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी बनने वाले अजय गुप्ता आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। बेहद साधारण परिवार में जन्मे अजय का बचपन आर्थिक तंगी और संघर्षों के बीच बीता। परिवार की मदद करने के लिए वे बचपन में जंगलों में तेंदूपत्ता बीनने का काम करते थे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को मरने नहीं दिया। सीमित संसाधनों और अभावों के बीच भी अजय ने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और लगातार मेहनत करते रहे।
गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने वाले अजय के पास न तो महंगी कोचिंग की सुविधा थी और न ही बेहतर संसाधन, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की। अजय ने दिन-रात मेहनत कर अपने लक्ष्य को हासिल किया और भारतीय वन सेवा में चयनित होकर अपने परिवार तथा पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।
अजय गुप्ता की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि इंसान के इरादे मजबूत हों तो कोई भी कठिनाई उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। आज वे उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुके हैं जो आर्थिक समस्याओं के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं। उनकी कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। छत्तीसगढ़ के इस “लाल” ने साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।