स्मार्ट चौपाटी , कभी राजधानी रायपुर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी, लेकिन आज यह बदहाली और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य शहरवासियों को आधुनिक खानपान और मनोरंजन की सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान स्थिति पूरी तरह विपरीत नजर आ रही है। पिछले करीब छह महीनों से यहां की लगभग 60 दुकानें बंद पड़ी हैं, जिससे न केवल व्यापार ठप हो गया है बल्कि सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
स्मार्ट चौपाटी को बड़े सपनों और योजनाओं के साथ विकसित किया गया था। यहां फूड स्टॉल, बैठने की आधुनिक व्यवस्था, लाइटिंग, पार्किंग और साफ-सफाई जैसी कई सुविधाएं दी गई थीं ताकि यह स्थान शहर के प्रमुख पर्यटन और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित हो सके। शुरुआती दिनों में यहां लोगों की अच्छी-खासी भीड़ उमड़ती थी और दुकानदारों का कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा था। लेकिन समय बीतने के साथ प्रशासनिक लापरवाही, रखरखाव की कमी और अव्यवस्थित संचालन के कारण यह परियोजना धीरे-धीरे बदहाल होती चली गई।
दुकानदारों का कहना है कि लंबे समय से चौपाटी में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। सफाई व्यवस्था खराब हो चुकी है, कई स्थानों पर बिजली और पानी की समस्या बनी रहती है, वहीं सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर हो गई है। इसके अलावा ग्राहकों की संख्या में लगातार कमी आने से व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। हालात इतने खराब हो गए कि अधिकांश दुकानदारों को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ीं। इससे उन परिवारों पर सीधा असर पड़ा जो पूरी तरह इस व्यवसाय पर निर्भर थे। कई लोगों के सामने अब रोजगार और घर चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा इस समस्या पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजना के रखरखाव और संचालन के लिए ठोस योजना नहीं बनाई गई। दुकानदारों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो आज यह स्थिति नहीं बनती। कई व्यापारियों ने प्रशासन से चौपाटी को फिर से व्यवस्थित करने, सुविधाएं बहाल करने और व्यापार शुरू कराने की मांग की है ताकि लोगों की आजीविका दोबारा पटरी पर लौट सके।
स्मार्ट चौपाटी की यह स्थिति केवल एक परियोजना की विफलता नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की पीड़ा भी है जिनकी उम्मीदें इससे जुड़ी थीं। शहर के लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन गंभीरता से पहल करे, साफ-सफाई, सुरक्षा और प्रचार-प्रसार पर ध्यान दे तो इस चौपाटी को फिर से जीवंत बनाया जा सकता है। फिलहाल यह परियोजना विकास के अधूरे वादों और प्रशासनिक उदासीनता की तस्वीर बनकर रह गई है। स्मार्ट सिटी के सपनों के बीच रायपुर की यह स्मार्ट चौपाटी अब अपने अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई लड़ती नजर आ रही है।