प्रधानमंत्री Narendra Modi की एक अपील के बाद देश के ज्वेलरी सेक्टर में बड़ा असर देखने को मिला। शेयर बाजार में कई प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में लगभग 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। इसका सीधा असर ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों और बाजार की धारणा पर पड़ा।
जानकारों के अनुसार, अगर लोग बड़ी संख्या में सोने की खरीदारी कम करते हैं तो देश में गोल्ड डिमांड में 10 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है, जहां शादी-ब्याह, त्योहारों और निवेश के रूप में बड़े पैमाने पर सोना खरीदा जाता है। ऐसे में मांग कम होने की आशंका से ज्वेलरी उद्योग में बेचैनी बढ़ गई है।
शेयर बाजार खुलते ही कई बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयर दबाव में दिखाई दिए। निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते सेक्टर में भारी गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वेलरी कारोबार काफी हद तक उपभोक्ता भावना और मांग पर निर्भर करता है। यदि ग्राहकों का रुझान कम होता है तो कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि सोने की कीमतें पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इसके कारण आम ग्राहकों की खरीदारी क्षमता प्रभावित हुई है। अब यदि खरीदारी टालने का संदेश जाता है तो बाजार में मंदी और गहरा सकती है। कई व्यापारिक संगठनों ने सरकार से उद्योग की स्थिति को ध्यान में रखते हुए संतुलित कदम उठाने की मांग भी की है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक तौर पर ज्वेलरी सेक्टर दबाव में रह सकता है, लेकिन लंबे समय में भारतीय बाजार में सोने की मांग पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है। भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। शादी और त्योहारों के सीजन में इसकी मांग फिर बढ़ सकती है।
फिलहाल बाजार में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है और निवेशक आगे की सरकारी नीतियों और बाजार संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं। ज्वेलरी कंपनियों के लिए आने वाले कुछ महीने चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं, जबकि ग्राहकों के बीच भी सोने की खरीदारी को लेकर असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है।