बिलासपुर में एयरपोर्ट के विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब नाइट लैंडिंग की अनुमति पहले ही मिल चुकी है, तब भी यहां से नियमित उड़ानें शुरू नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। लंबे समय से बिलासपुर एयरपोर्ट को पूर्ण रूप से विकसित करने की मांग उठती रही है, लेकिन योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। हालांकि, अब कोर्ट की सख्ती के बाद कुछ सकारात्मक पहल भी देखने को मिली है।इसी कड़ी में भारतीय सेना ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए 291 एकड़ जमीन प्रशासन को सौंप दी है, जिससे परियोजना को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह जमीन एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि एयरपोर्ट के विकसित होने से क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कोर्ट के निर्देशों का कितनी तेजी से पालन करता है और कब तक बिलासपुर से नियमित उड़ान सेवाएं शुरू हो पाती हैं। अगर समय पर काम पूरा होता है, तो यह शहर के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।