छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मक्के की आड़ में की जा रही अवैध अफीम की खेती का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस को गुप्त सूचना मिलने के बाद 6 मार्च को कार्रवाई करते हुए खेत में रेड मारी गई। इस दौरान करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अवैध रूप से उगाई गई अफीम की फसल बरामद हुई।
जानकारी के मुताबिक मामला जेवरा सिरसा चौकी क्षेत्र के समोदा गांव का है। बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से मक्के की फसल के बीच चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहे थे, ताकि किसी को शक न हो। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर अफीम की फसल को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली। वहीं दुर्ग रेंज के आईजी भी खेत में मौजूद रहे और जांच की निगरानी कर रहे हैं।
समोदा गांव में मक्के की आड़ में अफीम की अवैध खेती मिलने के मामले में अब सियासत भी गरमा गई है। इस मामले में गांव के सरपंच अरुण गौतम ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
सरपंच अरुण गौतम का आरोप है कि अफीम की खेती भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनायक ताम्रकर और बृजेश ताम्रकर द्वारा कराई जा रही थी। उनका यह भी कहना है कि जिस पंच ने पुलिस को इस अवैध खेती की सूचना दी थी, उसके साथ मारपीट की गई।
वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्हें अफीम की खेती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। वे केवल अपने खेत को देखने पहुंचे थे।
भाजपा नेताओं के अनुसार झिंझरी गांव में प्रीतिबाला ताम्रकर और मधुबाला ताम्रकर के खेत में कुछ बाहरी, खासकर राजस्थान से आए लोग चोरी-छिपे अफीम की खेती कर रहे थे।
इस मामले में पुलिस ने भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनायक ताम्रकर से भी पूछताछ की है। विनायक ताम्रकर का कहना है कि उन्होंने जमीन अधिया (आधी फसल के बंटवारे) में खेती के लिए दी थी और उन्हें अफीम की खेती की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा कारणों से वे अपने खेत में बिना अनुमति किसी को आने नहीं देते।
फिलहाल पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध खेती के पीछे कौन लोग शामिल हैं और यह काम कब से चल रहा था। साथ ही क्षेत्र में अन्य स्थानों पर भी जांच और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।