राजनांदगांव :- पलास फूलों को संग्रहित कर रंग गुलाल बनाने में इन दिनों माँ बम्लेश्वरी से जुड़ी हरियाली बहिनी के लगातार प्रयास से आधा दर्जनों से अधिक गांव में रंग गुलाल बनाई जा रही है वे अपने गाँव में पलास फूलों का महत्व से जागरूक करते हुए फूलों को एकत्रित कर रंगों से होली खेलने के लिए प्रेरित की जा रही है ताकि पलास फूलों का सदुपयोग हो सके। हरियाली बहिनी अभियान प्रमुख शिव कुमार देवांगन ने बताया की अभी ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पलास पेड़ों एवं जमीन में है जिसे होली में गरम पानी मिलाकर प्राकृतिक होली खेलने हरियाली बहिनी समझाईस दे रही है ताकि फूल का सदुपयोग हो सके साथ ही रंग गुलाल में होने वाले खर्च ना हो सके साथ ही उन्हें रंग-गुलाल बनाने की विधि बताकर गाँव-गाँव में महिलाओं को रंग-गुलाल बनाने तैयार की जा रही है इसका अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वही मोहला विकासखण्ड के ग्राम- बाँधाटोला (गोटाटोला) से सत्यबती छुरिया ब्लॉक के ग्राम फाफामार से धनेश्वरी मंडावी, चवेली में यमुना साहू ,खैरागढ़ के झीकादाह से नीता,सुमन साहू ने बताया कि, आस-पास क्षेत्रों में जाकर प्रोत्साहित कर रही है। देवांगन ने बताया कि रंग-गुलाल बनाने का प्रमुख उदे्दश्य केमिकल युक्त होली हो हमारे पास प्राकृति रूप से विभिन्न संसाधन होने के बावजूद बाजार से केमिकल रंग गुलाल से होली खेलते है। जिसके दुष्परिणाम हमारे स्वास्थ्य एवं त्वचा को होता है। देवांगन ने बताया कि हमारा प्रयास बड़ी संख्या में गांव गांव में रंग-गुलाल बनाने के लिए प्रशिक्षित करना है ताकि वे अपने गांव को केमिकल युक्त बनाने प्राकृतिक रंग-गुलाले कम लागत पर बना सके वे आस-पास क्षेत्रों में व्यवसाय करें, लोगों में प्राकृतिक होली खेलने के लिए उत्साहित रहते है। हम पलास के फूलों को बड़ी संख्या में पावडर बनाकर कम दरों पर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे है। अविभाजित राजनांदगांव जिले में बड़ी मात्रा में रंग-गुलाल खैरागढ़ के झीकादाह, राजनांदगांव से चवेली एवं पाताल भैरवी मंदिर परिसर, मोहला में बांधाटोला(गोटाटोला) छुरिया में फाफामार में उपलब्ध कराई जा रही है।