चौपाल लगाकर पुरुष नसबंदी के लिए किया जा रहा जागरूक
जगदलपुर 9 दिसम्बर। बकावण्ड ब्लॉक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा "मोर मितान मोर संगवारी" कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें चौपाल लगाकर लक्ष्य दम्पत्तियों को पुरुष नसबंदी के विषय पर विस्तृत जानकारी दी जा रही साथ ही इस दौरान पुरुष नसबंदी के सम्बन्ध में लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने का भी प्रयास किया जा रहा है ।
बकावण्ड ब्लॉक में पुरूष नसबंदी पखवाड़ा के तहत 537 लोगों की काउंसलिंग की गई है। इस दौरान 181 हितग्राहियों को निःशुल्क निरोध वितरण व 146 हितग्राहियों को गर्भनिरोधक गोली दी गई। वहीं 28 नवंबर से शुरू हुए सेवा वितरण चरण के तहत अब तक 46 पुरुषों की नसबंदी डॉ.आर के.चतुर्वेदी और डॉ.आर.एस.भंवर द्वारा की जा चुकी है।
इस सम्बन्ध में परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आर.के चतुर्वेदी ने बताया, " मोबिलाइजेशन चरण के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा ‘’मोर मितान मोर संगवारी’’ का आयोजन किया गया है। इसके तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ता क्षेत्र के समस्त लक्षित दंपतियों से संपर्क कर व्यक्तिगत चर्चा में नसबंदी के फायदे बताये गए। साथ ही नसबन्दी के लिये सम्भावित लाभार्थियों का पंजीकरण किया गया है।पुरुष नसबंदी एक आसान प्रक्रिया है, यह मात्र कुछ समय में ही पूर्ण हो जाती है। इसे अपनाकर दंपती अपने को स्वस्थ रखते हुए परिवार का बेहतर पोषण कर सकते है।"
बकावण्ड बी.एम.ओ. डॉ.आर.एस.भंवर ने बताया, " सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बकावण्ड में पुरूष नसबंदी की प्रक्रिया हितग्राहियों की सुविधा के अनुसार उपलब्ध कराई जा रही है। परिवार नियोजन अपनाने वाले दम्पतियों को दो बच्चों की समझाइश देकर परिवार की सहमति पर ही नसबंदी की जाती है।“
नसबंदी है पूरी तरह से सुरक्षित
● पुरुष नसबंदी परिवार नियोजन का एक सरल, सुरक्षित और असरदार उपाय है।
● पुरुष नसबंदी या एनएसवी (नॉन स्कल्पेल वैसेक्टोमी या बिना चीरा-बिना टाका नसबंदी) करवाने के पश्चात किसी तरह के आराम की जरूरत नहीं पड़ती।
● पुरुष नसबंदी या एनएसवी करवाने के बाद साइकिल, रिक्शा, बस आदि चलाने में किसी तरह की तकलीफ नहीं होती है।
● पुरुष नसबंदी या एनएसवी करवाने में 5 से 10 मिनट का ही समय लगता है और एनएसवी हो जाने पर अस्पताल में भर्ती होने भी जरूरत नहीं होती।
● पुरुष नसबंदी या एनएसवी कराने से पति-पत्नी आपसी शारीरिक संबंधों का बेहतर आनंद उठा सकते हैं।
प्रदेश में एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार मात्र 0.8 प्रतिशत है पुरुष ही नसबंदी करा रहें है। इसलिए परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता बढाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं ऐसे ही प्रयासों में से एक प्रयास "मोर मितान मोर संगवारी" कार्यक्रम भी है जिसके माध्यम से पुरुषों को पुरुष नसबंदी के फायदे बताये जा रहे हैं ।