ठगी का मामला
डॉ. प्रकाश गुप्ता, जो कि एक रिटायर्ड सिविल सर्जन हैं, ने पुलिस को बताया कि उन्होंने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा कमाने के नाम पर 74.49 लाख रुपये की ठगी का सामना किया। 16 जुलाई 2024 को रेंज साइबर थाना रायपुर में अपराध क्रमांक 8/24 के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस की कार्यवाही
रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा ने रेंज साइबर थाना की टीम को तकनीकी साक्ष्य एकत्र कर आरोपियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। इस सिलसिले में पुलिस ने आरोपी के बैंक खाता नंबर और मोबाइल फोन नंबर की जानकारी हासिल की।
आरोपियों की पहचान
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी आशीष साहू ने विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाकर अपने साथी विकास चंद्राकर को सौंपे थे। इन खातों में 25 लाख रुपये जमा करवाए गए थे। बैंक खातों के एवज में विकास चंद्राकर ने आशीष साहू को 3.70 लाख रुपये कमीशन के रूप में दिए थे।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भूमिका
विकास चंद्राकर, जो कि भिलाई का निवासी और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, ठगी में वर्चुअल नंबर का उपयोग करता था। उसने अन्य लोगों से बैंक खाते किराए पर लेकर ठगी की रकम जमा की। इन बैंक खातों में विभिन्न राज्यों के कुल 80 पुलिस थाना और साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज है। पुलिस ने विकास चंद्राकर के पास 10 से अधिक बैंक खातों और एक XUV 700 गाड़ी की भी जानकारी प्राप्त की है।
गिरफ्तारी और अदालत में पेशी
आरोपी आशीष साहू (36 वर्ष) और विकास चंद्राकर (33 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। आशीष साहू, स्पात नगर भिलाई, दुर्ग का निवासी है, जबकि विकास चंद्राकर मैत्री नगर रिसाली, भिलाई का निवासी है।इस केस ने रायपुर पुलिस की सतर्कता और तकनीकी विशेषज्ञता को एक बार फिर साबित किया है, जिससे ठगों के मंसूबों पर पानी फिरा और जनता को राहत मिली।