भारतीय आपराधिक कानून में कुछ परिवर्तन किये गये है जिन्हें आज 01 जुलाई 2024 को लागू किया गया है |
1.नवीन भारतीय न्याय संहिता
2. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
3. भारतीय साक्ष्य अधिनियम
भारतीय चिंतन पर आधारित न्याय प्रणाली
इन कानून का उद्देश्य भारतीय कानून प्रणाली में सुधार करना और भारतीय सोच पर आधारित न्याय प्रणाली स्थापित करना है|
नए आपराधिक कानून 'लोगों को औपनिवेशिक मानसिकता और उसके प्रतिको से मुक्त करेंगे' और हमारे मन को भी उपनिवेशवाद से मुक्त करेंगे|
यह 'दंड के बजाय न्याय पर ध्यान केंद्रित' है|
'सबके साथ समान व्यवहार' मुख्य विषय है|
यह कानून भारतीय न्याय संहिता की वास्तविक भावना को प्रकट करते हैं|
इन्हें भारतीय संविधान की मूल भावना के साथ बनाया गया है|
यह कानून व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देते है|
यह मानव अधिकारों के मूल्यों के अनुरूप है|
यह पीड़ित- केंद्रित न्याय सुनिश्चित करेंगे|
इन कानून की आत्मा न्याय समानता और निष्पक्षता है|
पीड़ित केंद्रित दृष्टिकोण
यह पीड़ित को आपराधिक कार्यवाही में एक हितधारक के रूप में मान्यता देता है तथा उसे मुकदमा वापस लेने से पूर्व सुने जाने का अधिकार प्रदान करता है (धारा 307 (बीएनएसएस)
पीड़ित को FIR की एक प्रति प्राप्त करने तथा उसे 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के बारे में सूचित किए जाने का अधिकार है धारा 193(3) (ii) बीएनएसएस)
गवाहों के धमकियों और भाई से बचने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को स्वीकार करते हुए गवाह संरक्षण योजना की शुरुआत की गई (धारा 398 बीएनएसएस)
बलात्कार पीड़िता का बयान केवल महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा और उसकी अनुपस्थिति में किसी महिला की उपस्थिति में पुरुष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा (धारा 183(6) (ए) बीएनएसएस)
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS)
मुख्य परिवर्तन
आईपीसी में धाराओं की संख्या 511 से हटकर बीएनएस में 358 कर दी गई|
20 नए अपराध जोड़े गए|
कई अपराधों के लिए अनिवार्य न्यूनतम सजा का प्रावधान किया गया है|
6 छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा का प्रावधान किया गया है|
कई अपराधों में जुर्माना बढ़ाया गया है|
कई अपराधों में सजा की अवधि बढ़ाई गई है|
कुछ विशेषताएं
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को एक अध्याय में समेकित किया गया है|
धारा 69: झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है|
धारा 70 (2): सामूहिक बलात्कार की सजा में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है|
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS)
मुख्य परिवर्तन
सीआरपीसी में धाराओं की संख्या 484 से बढ़ाकर बीएनएसएस में 531 की गई |
177 धाराओं को प्रतिस्थापित किया गया|
9 नई धाराएं जोड़ी गई|
14 धाराएं निरस्त की गई|
कुछ विशेषताएं
जांच में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है |
मजिस्ट्रेट द्वारा जुर्मानो में वृद्धि की गई है|
FIR प्रक्रियाओं और पीड़ितों की सुरक्षा को सुव्यवस्थित करना|
धारा 173: ज़ीरो FIR और e- FIR का प्रावधान किया गया है
धारा 176(1) (ख): यह कानून ऑडियो वीडियो के माध्यम से पीड़ित को बयान रिकॉर्डिंग का अधिकार देता है
भारतीय साक्ष्य अधिनियम *2023 (BSA)*
मुख्य परिवर्तन
आईईए मैं धाराओं की संख्या 167 से बढ़ाकर बीएसए 170 की गई|
24 धाराएं बदली गई|
दो नई धाराएं जोड़ी गई|
6 धाराएं निरस्त की गई|
कुछ विशेषताएं
इलेक्ट्रॉनिक / डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में मान्यता देता है|
डिजिटल साक्ष्य प्रमाणिकता के लिए रूपरेखा प्रदान करता है|
धारा 2 (घ): दस्तावेजों की विस्तारित परिभाषा
धारा 61: डिजिटल रिकॉर्ड की स्वीकार्यता में समानता दी गई है
धारा 62 और 63: इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता दी गई है
महिलाएं और बच्चे
नए आपराधिक कानून में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध से निपटने के लिए 37 धाराएं शामिल है|
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को पीड़ित और अपराधी दोनों के संदर्भ में लिंग तटस्थ बनाया गया है | (धारा 2 बीएनएसएस)
18 वर्ष से कम आयु की लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार के लिए आजीवन कारावास या मृत्यु दंड का प्रावधान किया गया है (धारा 70 बीएनएस)
झूठे वादे या झूठे पहचान के आधार पर यौन शोषण करना अब आपराधिक कृत्य माना जाएगा| (धारा 69 बीएनएस)
चिकित्सकों को बलात्कार से पीड़ित महिला की मेडिकल रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर जांच अधिकारी को भेजने का आदेश दिया गया है (धारा 51(3) बीएनएसएस)
समय पर और शीघ्र न्याय
समयावधि के लिए बीएनएसएस मैं 45 धाराओं को जोड़ा गया है|
आरोप पर पहली सुनवाई के प्रारंभ से 60 दिनों के भीतर आरोप तय किया जाएंगे (धारा 251 बीएनएसएस)
आरोप तय होने की तारीख से 90 दिन पूरे होने के बाद घोषित अपराधियों के खिलाफ अनुपस्थिति में अभियोजन की कार्यवाही शुरू होने चाहिए| (धारा 356 बीएनएसएस)
अभियोजन के लिए मंजूरी, दस्तावेजों की आपूर्ति, प्रतिबद्ध कार्यवाही निर्वहन याचिकाओं को दाखिल करना, आरोप तय करना, निर्णय की घोषणा और दया याचिकाओं को दाखिल करना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है (धारा 251, 258 बीएनएसएस)
आपराधिक कार्यवाही में दो से अधिक स्थगन देने की अनुमति नहीं है| (धारा 346 बीएनएसएस)
समन जारी करने और उसकी तमिल करने तथा न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग| (धारा 530 बीएनएसएस)
अपराध एवं दंड को पुनपरिभाषित किया गया
छीनाझपटी एक संज्ञय, गैर- जमानती और गैर- शमनीय अपराध है (धारा 304 बीएनएस)
' आतंकवादी कृत्य' की परिभाषा: इसमें ऐसे कृत्य शामिल है जो भारत की एकता अखंडता संप्रभुता सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं या किसी समूह में आतंक फैलाते हैं (धारा 113 बीएनएस)
' राजदोह' में परिवर्तन: राजद्रोह के अपराध को समाप्त कर दिया गया है तथा भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों को दंडित करने के लिए 'देशद्रोह' शब्द का प्रयोग किया है (धारा 152 बीएनएस)
'मांब लीचिंग' को एक ऐसी अपराध के रूप में शामिल किया गया जिसके लिए अधिकतम सजाम मृत्युदंड है (धारा 103 (2) बीएनएस)
संगठित अपराध को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है| (धारा 111 बीएनएस)
पुलिस की जवाब देही और पारदर्शिता
तलाशी और जब्ती के दौरान वीडियोग्राफी अनिवार्य है (धारा 105 बीएनएसएस)
कोई भी गिरफ्तारी, ऐसे अपराध के मामले में जो 3 वर्ष से काम के कारावास से दंडनीय है और ऐसा व्यक्ति जो गंभीर बीमारी से पीड़ित है यह 60 वर्ष से अधिक की आयु का है ऐसे अधिकारी, जो पुलिस उप अधीक्षक से नीचे की पंक्ति का ना हो कि पूर्व अनुमति के बिना नहीं की जाएगी (धारा 35 (7) बीएनएसएस)
गिरफ्तारी तलाशी जब्ती और जांच में पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने के लिए 20 से अधिक धाराएं शामिल की गई है
असंज्ञय मामलों में ऐसे सभी मामलों की दैनिक डायरी रिपोर्ट मजिस्ट्रेट को प्रकाशित रूप से भेजी जाएगी (धारा 174 (1) (ii) बीएनएसएस)
नागरिक केंद्रित कानून
भारतीय लोकाचार को अपने मूल में रखने वाले नए आपराधिक कानून अधिक नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में बदलाव के प्रतीक है
बीएनएसएस की धारा 173 (1) में नागरिकों को मौखिक अथवा इलेक्ट्रॉनिक संचार ( ई- एफआईआर), बिना उसे क्षेत्र पर विचार किया जहां अपराध किया गया है फिर दर्ज करने का अधिकार दिया गया है
बीएनएसएस की धारा 173 (2) (1) के तहत नागरिक बिना किसी देरी के पुलिस द्वारा अपनी फिर की एक निशुल्क प्रति प्राप्त करने के हकदार हैं
बीएनएसएस की धारा 193 (3) (ii) के तहत पुलिस को 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के बारे में पीड़ित को सूचित करना अनिवार्य है
बीएनएसएस की धारा 184 (1) के अनुसार पीड़िता की मेडिकल जांच उसकी सहमति से और अपराध की सूचना मिलने के 24 घंटे के भीतर की जाएगी
बीएनएसएस की धारा 184 (6) के तहत मेडिकल रिपोर्ट चिकित्सक द्वारा 7 दिनों के भीतर भेजी जाएगी