नागौरी नस्ल के बैलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं.....

त्वरित ख़बरें -सत्यभामा दुर्गा रिपोर्टिंग

नागौरी नस्ल के बैलों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। गोरक्षा के नाम पर ‘गुंदागर्दी’ करने वाले लोग एक बार फिर नागौरी नस्ल के बैलों के ‘दुश्मन’ बन रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण इन दिनों प्रदेश के चित्तौडगढ़़ जिले में देखा जा रहा है, जहां मेड़ता सिटी के राज्य स्तरीय श्री बलदेव पशु मेले से खरीदे गए बैलों को सभी सरकारी कागज होने के बावजूद चार दिन से रोक रखा है। हजारों-लाखों रुपए में कृषि कार्य के लिए मध्यप्रदेश के किसानों की ओर से खरीदे नागौरी नस्ल के बैलों को यह कहकर चित्तौडगढ़़ जिले के शिम्भूपुरा गांव में रोक लिया कि इनकी तस्करी हो रही है, जबकि पशुपालकों ने यहां के पशुपालकों को बड़ी रकम देकर बैल खरीदे, लेकिन गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले लोगों ने पशुपालकों की गाडिय़ां रोककर करीब 404 बैलों को वहां की गोशाला में छुड़वा दिया।नीमच में बैलों से भरे ट्रकों को रुकवाकर वापस भेजा तो चित्तौडगढ़़ के शिम्भूपुरा 28 ट्रकों में भरे 404 बैलों को रोककर गोशाला में छुड़वा दिया। गंभीर बात यह है कि पशुपालकों के पास मेला अधिकारी की ओर से जारी रवन्ना पर्ची, बिक्री पर्ची व स्वास्थ्य सर्टिफिकेट सहित अन्य सभी दस्तावेज हैं, जिनमें पशु की उम्र, लिंग, पशु की नस्ल का इंद्राज तीन पशु चिकित्साधिकारियों की टीम ने किया है। परिवहन किए जा रहे पशुओं की उम्र भी 3 साल से अधिक है, इसके बावजूद वहां के पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी भी पशुपालकों की बजाए कथित गोरक्षकों का साथ दे रहे हैं। पशुपालक प्रेमसुख जाजड़ा ने कहा कि इस प्रकार बाहरी राज्यों के पशुपालकों को परेशान किया गया तो वे आना ही बंद कर देंगे, जिसका सीधा नुकसान स्थानीय पशुपालकों को होगा।