450 होटल में से 360 में फायर सेफ्टी का पालन नहीं, 181 ने एनओसी रिनुअल तक नहीं कराया

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इंदिरा मार्केट में हुए अग्नि हादसे के बाद एक बार फिर फायर सेफ्टी को लेकर ट्विनसिटी में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते समय रहे ऐसे हादसों को नियंत्रित नहीं किया जा सका है। इसे लेकर दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। जिले के सभी 10 निकायों से छोटे-बड़े होटल, शॉपिंग मॉल, भवन व सार्वजनिक स्थलों की जानकारी जुटाई।

इसमें जिले में 450 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल, लॉज, शॉपिंग मॉल, हॉस्पिटल व अन्य सार्वजनिक स्थल होने की जानकारी मिली। इनमें भी 360 जगहों पर सेफ्टी नार्म्स का पालन ही नहीं किया जा रहा। उनमें 181 ऐसे हैं जिन्होंने स्थानीय प्रशासन से मिली अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) तक का नवीनीकरण नहीं कराया। अग्नि सुरक्षा उपकरणों की पड़ताल में इसका खुलासा हुआ है।

इमारतों के निर्माण से पहले अग्नि सुरक्षा उपकरणों की जांच करने की जिम्मेदारी निगम की है। लेकिन अधिकारी बीसीसी सार्टिफिकेट जारी करने के बाद नियमित जांच के लिए नहीं पहुंच रहे। इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों की जांच के लिए कमेटी तक गठित नहीं की है। इसके चलते न ही जांच हो रही है न ही किसी प्रकार की कार्रवाई हो रही है।

जानिए : सरकारी सेटअप में भी फायर सेफ्टी को लेकर बरती जा रही लापरवाही

फायर सेफ्टी के लिए भवनों के लिए जारी गाइडलाइन

  • इमारत फ्रंट में कम से कम 6 मीटर की खुली जगह का होना आवश्यक किया गया है।
  • इंट्री व एक्जिट डोर के अलावा इमरजेंसी डोर अनिवार्य रूप से हर इमारत में होना चाहिए।
  • फायर सेफ्टी ऑफिसर की अलग से नियुक्ति होनी चाहिए।
  • फायर कंट्रोल रूम का निर्माण ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए।
  • अग्नि सुरक्षा से बचाव के लिए ये उपकरण होना अनिवार्य
  • अंडर ग्राउंड और ओवर हैड वॉटर टैंक होना चाहिए।
  • इमारत के हर कमरे में हौज पाइप और हॉजरी का होना अनिवार्य किया गया है।
  • ऑटोमेटिक स्प्रिंगलर और स्मोक डिटेक्टर होना हर इमारत में अति आवश्यक है।
  • फायर सेफ्टी उपकरणों के लिए अलग से बिजली की वायरिंग की जानी चाहिए।
  • फायर सेफ्टी की वायरिंग के लिए अगल से फायर प्रूफ कंट्रोल रूम हो।

केस 1: हॉजरी पाइपलाइन का ओवर हैड टैंक नदारद, मेंटेनेंस नहीं हो रहा
जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी नार्म्स का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। यहां फायर स्टिंग्विस और स्प्रिंगलर मौजूद है। लेकिन मेंटेनेंस नहीं होने की वजह स्प्रिंगलर खराब हो चुके हैं। इसके अलावा कई जगह फायर स्टिग्विस भी एक्सपायर भी हो चुके हैं। इसी तरह हॉजरी पाइप होने के बावजूद ओवर हेड टैंक नहीं हो केवल शो-पीस बने हुए हैं। प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया है।

केस 2: कोविड सेंटर में कर्मचारियों को नहीं दी गई अब तक ट्रेनिंग
सीएम मेडिकल कालेज कचांदुर में कोविड मरीजों के इलाज के लिए 237 बेड हैं। इस हॉस्पिटल में छोटे-छोटे अग्निशमन सिलेंडर लगाए हैं। लंबे समय से ये सिलेंडर बंद हैं। इसे अपडेट या मेंटेनेंस तक नहीं किया गया। यहां किसी कर्मचारी को अग्नि फायर सिस्टम चलाने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। वर्तमान में यहां अग्निशमन विभाग का वाहन 24 घंटे खड़ी रहती है। तत्कालीक सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं।

सभी बड़ी इमारतों में नेशनल बिल्डिंग कोड लागू, फिर भी खानापूर्ति
होटल, लॉज, शॉपिंग मॉल, कॉम्पलेक्स समेत बड़ी इमारतों में अग्नि सुरक्षा के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड लागू किया गया। इसके अनुसार इमारतों में अग्नि सुरक्षा के उपकरण होना अनिवार्य है। इसी आधार पर निकायों को बिल्डिंग परमिशन जारी किया जाना है। भवन निर्माण के बाद पूर्णत: प्रमाणपत्र देना है। ताकि अग्निशमन विभाग संबंधित प्रतिष्ठान को फायर एनओसी का सार्टिफिकेट दे सकें। नियमित जांच नहीं हो रही।

अग्नि सुरक्षा को लेकर पांच साल में एक पर भी कार्रवाई नहीं की गई
अग्नि सुरक्षा को लेकर जिला व स्थानीय प्रशासन गंभीर नहीं है। पिछले 5 साल में जिलेभर में एक भी जगह अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो साल पहले जरूर एक अस्पताल की जांच की, कार्रवाई का दावा भी किया गया। नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। महज जवाब लेकर पूरे मामले में लीपापोती कर दी गई। इसके अलावा अन्य किसी भी जगह पर फायर सेफ्टी की जांच को लेकर न कमेटी बनी।

सिर्फ फायर उपकरण व स्प्रिंगलर लगाए गए, उसकी भी जांच नहीं
शहर के छोटे-छोटे होटल और लॉज समेत तमाम अन्य प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी उपकरण जरूर लगें हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच कहीं नहीं हो रही। न ही संचालकों द्वारा इसे गंभीरता से लिया जा रहा। पॉवर हाउस, नंदिनी रोड, स्टेशन रोड के होटल व लॉज में लगभग एक जैसे हालात हैं। इनमें कहीं भी सेफ्टी नार्म्स का पालन नहीं हो रहा। दुर्ग के स्टेशन रोड, इंदिरा मार्केट, सराफा बाजार में भी लापरवाही बरती जा रही।

50 % इमारतों को नोटिस जारी, कार्रवाई नहीं की गई
दुर्ग-भिलाई में अग्नि सुरक्षा की एनओसी लेने को लेकर काफी उदासीनता है। स्थिति यहां लोगों ने भवन निर्माण के समय एनओसी ली थी। इसके बाद कभी उसका रिन्युअल करता ही नहीं। अग्निशमन विभाग के मुताबिक वर्तमान में स्थिति ऐसी बनी है कि करीब 50 से ज्यादा इमारतों की एनओसी तक रिन्युअल भी नहीं हुआ है।

प्रशासन के आदेश पर ही कार्रवाई का प्रावधान

  • आग की घटना होने पर मामले की जांच करने का काम अग्निशमन विभाग का है। उनके द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर पुलिस विभाग आगे की कार्रवाई करता है। यदि रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की जाती है तो ही संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अपराध दर्ज किया जाता है। जांच भी की जाती है। -संजय ध्रुव, एएसपी सिटी दुर्ग

हम नियमित जांच करते हैं, नियम पहले से सख्त हुए

  • वैसे मेरा ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन हमारे द्वारा नियमित रूप से जांच की जाती है। यह बोलता गलत है कि जांच नहीं होती। कोरोना की वजह काफी एनओसी रिन्युअल नहीं हो पाई। नोटिस भेज रहे हैं। नियम पहले से अधिक कड़े कर दिए हैं। अब रायपुर से सीधी मॉनिटरिंग होती है। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। एक बार पुन: अभियान चलाया जाएगा। -एसडी विश्वकर्मा, अग्निशमन अधिकारी, दुर्ग