भिलाई- इंडियन रेलवे ने भिलाई स्टील प्लांट को इस साल पिछले साल की तुलना में 1 लाख टन अधिक रेल पटरी का ऑर्डर दिया है। पिछले वित्त वर्ष 2022-23 में भिलाई स्टील प्लांट ने 12 लाख 53 हजार 227 टन से अधिक रेल पटरी की आपूर्ति की थी। इस साल 1 लाख टन अधिक यानी 13 लाख 20 हजार टन से अधिक की सप्लाई करनी होगी।
भिलाई स्टील प्लांट से मिली जानकारी के मुताबिक यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) शुरू होने केबाद बीएसपी के पास रेलपांत उत्पादन करने की क्षमता बढ़कर २० लाख टन हो गई है। बीएसपी पहले पुराने रेल स्ट्रक्चर मिल (आरएसएम) से ही 7 से 8 लाख टन तक सालाना रेलपांत उत्पादन कर रहा था। यूआरएम की उत्पादन क्षमता करीब 12 लाख टन प्रतिवर्ष है।
आंकड़ों की बात करें तो बीएसपी ने 2016-17 में भारतीय रेल को 6.67 लाख टन रेलपांत की आपूर्ति की थी। वहीं 2017-18 में 9 लाख टन की डिमांड मिली थी। इसमें से बीएसपी ने करीब 8.8 लाख टन रेलपांत की आपूर्ति की थी। इस बार 13 लाख टन से अधिक की मांग है। वहीं बीएसपी की क्षमता इससे भी अधिक है। संयंत्र को समय पर रॉ-मटेरियल मिल जाए, तो आरएसएम और यूआरएम की टीम पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ये डिमांड भी पूरी कर सकती है।
बीएसपी के सामने रेक बना बड़ी चुनौती
बीएसपी के सामने रेक की कमी एक बड़ी चुनौती है। उत्पादन करने के बाद बीएसपी को हर माह रेलवे से कम से कम 50 रैक चाहिए। इसमें कमी आ जाने से वक्त पर रेल पटरी की आपूर्ति नहीं हो पाएगी। इससे कहीं न कहीं रेल पांत के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। इस साल ओडिसा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में रेल पटरी की आपूर्ति की जानी है |
हर माह करनी होगी सवा लाख टन रेल पटरी की आपूर्ति
बीएसपी प्रबंधन ने तय किया है कि हर माह कम से कम एक से सवा लाख टन रेल पटरी की आपूर्ति करेगा। यदि उसने यह लक्ष्य हासिल कर लिया तो साल के अंत तक उसके पास उत्पादन को लेकर दबाव भी कम ही रहेगा।
7 हजार किलोमीटर पटरी बिछाएगा रेलवे
भिलाई स्टील प्लांट से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 7,000 किलोमीटर की दूरी के लिए नए रेलवे ट्रैक बिछाने का टारगेट रखा है। रेलवे बोर्ड नई रेलवे लाइन बिछाने में इस वित्त वर्ष में 26,000 करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। वहीं गेज बदलने में 3.8 करोड़ खर्च करने की तैयारी में है।
भिलाई स्टील प्लांट